90 वर्षीय महिला का जटिल महाधमनी एन्यूरिज्म का सफल उपचार, छत्तीसगढ़ में अपनी तरह का पहला मामला

रायपुर, 4 जुलाई 2026: एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर ने 90 वर्षीय महिला का जटिल एंडोवैस्कुलर एओर्टिक एन्यूरिज्म रिपेयर (एवर) सफलतापूर्वक किया है। यह छत्तीसगढ़ में 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के मरीज पर इस प्रकार की पहली सफल प्रक्रिया मानी जा रही है।

मरीज पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल की ओपीडी में पहुंची थीं। जांच में पता चला कि उनकी महाधमनी (एओटी) के निचले हिस्से में 64 मिमी का बड़ा एन्यूरिज्म (धमनी में असामान्य सूजन) था, जिसमें रक्त का बक्का भी मौजूद था। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि एन्यूरिज्म कभी भी पाट सकता था, जिससे मरीज की जान को गंभीर खतरा था। मामला इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मरीज की सरुवाहिनी अत्यधिक घुमावदार थी और विनानीव आंतों की रक्त पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण धमनियां एन्यूरिज्म के बहुत करीब स्थित थी।

यदि इस स्थिति में एन्यूरिज्म फट जाता, तो मरीज के बचने की संभावना लगभग शून्य होती। वहीं, 90 वर्ष की आयु और पहले से मौजूद हृदय संबंधी समस्याओं के कारण पारंपरिक ओपन सर्जरी भी अत्यधिक ओखिमपूर्ण थी। ऐसे में विशेषज्ञों ने न्यूनतम चौरा लगाने वाली एंडोवैस्कुलर तकनीक (एवर) को सबसे सुरक्षित विकल्प माना।

चुनौती यह थी कि एन्यूरिज्म को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए, लेकिन किडनी और आंतों तक रक्त की आपूर्ति प्रभावित न हो। विशेषग्रा टीम ने 26 जून 2026 को विशेष “रिवर्स स्लाइडिंग तकनीक और बड़े स्टेट ग्राफ्ट का उपयोग करते हुए यह जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की।

इस प्रक्रिया का नेतृत्व करने वाले डॉ. सुमंता शेखर पाड़ी, वरिष्ठ सलाहकार हृदय रोग एवं क्लीनिकल लीड, एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर ने कहा, “मरीज की आयु और रक्तवाहिनी की जटिल संरचना के कारण यह बेहद चुनौतीपूर्ण मामला था। हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता एन्यूरिज्म का सफल उपचार करना और साथ ही किडनी एवं आंतों तक रक्त प्रवाह को सुरक्षित बनाए रखना था।”

इस अटिल प्रक्रिया में कई विशेषज्ञों की अहम भूमिका रही। डॉ. मोहम्मद वसीम खान, कंसल्टेंट कार्डियोवैस्कुलर सर्जन ने बड़े आकार के स्टेंट को शरीर के भीतर सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए रक्तवाहिनी तक पहुंच बनाई तथा प्रक्रिया पूरी होने के बाद रक्तस्राव और अन्य अटिलताओं से बचाव के लिए उस स्थान को सुरक्षित रूप से बंद किया।

पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की स्थिति स्थिर बनाए रखने के लिए उन्हें जनरल एनेस्थीसिया दिया गया, जिसकी जिम्मेदारी डॉ. अरुण अंडप्पन, सीनियर कंसल्टेंट एनेस्थीसियोलोजी तथा डी. स्नेहा खोबरागहें, कंसल्टेंट एनेस्थीसियोलॉजी ने संभाली।

Author: Sudha Bag

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