घुमका नगर पंचायत के वार्ड में टिकट वितरण में ‘हाथ’ की सफाई:कांग्रेस के चुनावी गणित से आदिवासी, साहू और सिन्हा समाज गायब ?


(जसीम कूरैशी की रिपोर्ट)
छूरिया जानकारी अनुसार नगर पंचायत चुनाव घूमका की सरगर्मी के बीच पार्षदों के टिकट बंटवारे ने राजनीतिक गलियारों का पारा बढ़ा दिया है। चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही कांग्रेस की ‘टिकट एक्सप्रेस’ पटरी से उतरती नजर आ रही है? सबका साथ और सामाजिक न्याय का दम भरने वाली पार्टी ने इस बार जो लिस्ट जारी की है, उसने कई बड़े और रसूखदार समाजों के आत्मसम्मान को सीधे ठेस पहुंचाई है?
आदिवासी समाज: वादे बड़े, भागीदारी शून्य
सबसे हैरान करने वाला फैसला अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को लेकर सामने आया है। जिस आदिवासी वर्ग को प्रदेश की राजनीति की रीढ़ माना जाता है, उसे इस चुनाव में पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया ?एक भी सीट पर आदिवासी प्रत्याशी को टिकट न देना इस वर्ग का खुला अपमान है। जो दल खुद को जल-जंगल-जमीन का हितैषी बताता था, उसने टिकट बांटते समय इस बड़े वर्ग को ‘नॉट रीचेबल’ मोड पर डाल दिया ?
तेली और कलार समाज को भी अंगूठा?
नाराजगी सिर्फ आदिवासी समाज तक सीमित नहीं है। चुनाव के नतीजों को पलटने का दम रखने वाले और संख्या बल में मजबूत तेली समाज और कलार समाज को भी इस लिस्ट में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। इन दोनों समाजों के किसी भी स्थानीय नेता को कांग्रेस ने इस काबिल नहीं समझा कि उन्हें चुनावी मैदान में उतारा जा सके?
लिस्ट को देखकर साफ है कि कांग्रेस ने जमीनी हकीकत और सामाजिक संतुलन को ताक पर रख दिया। जातिगत जनगणना और आनुपातिक प्रतिनिधित्व की बातें करने वाली पार्टी का यह कदम उनकी कथनी और करनी के अंतर को साफ उजागर करता है।
क्या भुगतना पड़ेगा खामियाजा?
राजनीति में उपेक्षा का जवाब जनता हमेशा वोट की चोट से देती है। आदिवासी, तेली और कलार समाज जैसे बड़े मतदाता वर्गों को नाराज करके कांग्रेस ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली ? अब देखना यह होगा कि चुनावों में इस ‘टिकट कटिंग’ का असर कांग्रेस की किस्मत पर क्या रंग दिखाता है। समाज के लोगों में पनप रहा यह गुस्सा क्या चुनावी नतीजों में कांग्रेस की लुटिया डुबोएगा? यहा तो वक्त ही बतायेगा शयाद इसलिए? घुमका नगर पंचायत आगमन पर प्रदेश अध्यक्ष जनसंपर्क नहीं कर पाये क्या बागड़ोर संभलने वाले कार्यकर्ताओं की भीड़ एकत्रित करनें में रहें असफल सिर्फ नेताओं की ही रही क्या भीड़?

Author: Sudha Bag

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