छूरिया के रिषित मेडिकल स्टोर पर ‘ पुर्व में हूए प्रशासनिक कार्यवाही पर क्या लीपा-पोती’ का खेल:कार्रवाई के दौरान एसडीएम ने कहा था- ‘लाइसेंस रद्द करने की करेंगे कार्रवाई’, अब महीनों बाद भी फाइलें ठंडे बस्ते में!


(जसीम कुरैशी की रिपोर्ट)
खुज्जी विधानसभा क्षेत्र में अवैध और एक्सपायरी दवाओं के जखीरे का मामला; कार्रवाई के वक्त बड़ी-बड़ी बातें करने वाला प्रशासन अब साध चुका है रहस्यमयी चुप्पी, जनता में भारी आक्रोश
श्रमबिदू
छूरिया: खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नगर पंचायत छूरिया स्थित ‘रिषित मेडिकल स्टोर’ पर पूर्व में प्रशासन और ड्रग विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की गई बड़ी छापेमारी की कार्रवाई अब पूरी तरह से संदेहास्पद नजर आ रही है। जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस गंभीर मामले में शुरुआती तत्परता दिखाने के बाद अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रशासन पूरे मामले पर ‘लीपा-पोती’ करने में जुट गया है। कार्रवाई के कई दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी संचालक के खिलाफ कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे प्रशासनिक मिलीभगत की बू आ रही है।
अवैध और एक्सपायरी दवाओं का मिला था बड़ा जखीरा
गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व गुप्त सूचना के आधार पर छूरिया प्रशासनिक टीम ने रिषित मेडिकल स्टोर पर औचक दबिश दी थी। इस दौरान दुकान और उसके गुप्त ठिकानों से भारी मात्रा में प्रतिबंधित, अवैध और एक्सपायरी (समयावधि पार) दवाओं का जखीरा बरामद किया गया था। नियमों को ताक पर रखकर इन जानलेवा दवाओं को बाजार में खपाने की तैयारी थी। टीम ने मौके पर पंचनामा बनाकर दवाओं को जब्त किया था और दुकान को सील करने का दावा किया था।
एसडीएम का दावा निकला खोखला, सिर्फ सुर्खियां बटोरने दिया था बयान!
छापेमारी की कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) ने मीडिया और जनता के सामने बड़े-बड़े दावे किए थे। कार्रवाई के दौरान स्वयं एसडीएम द्वारा यह आधिकारिक बयान दिया गया था कि “उक्त मेडिकल स्टोर में पाई गई गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए इसके लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।” एसडीएम के इस कड़े रुख के बाद छूरिया की जनता को उम्मीद जगी थी कि स्वास्थ्य माफियाओं पर नकेल कसी जाएगी। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी एसडीएम का वह बयान सिर्फ एक खोखला दावा साबित हुआ है। धरातल पर न तो लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई आगे बढ़ी और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया।
रसूखदारों को बचाने के लिए फाइलें दबाने का खेल शुरू!
सूत्रों की मानें तो रसूखदार राजनीतिक और प्रशासनिक रस्सियों के सहारे इस पूरे मामले को रफा-दफा करने का खेल परदे के पीछे चल रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर और स्थानीय ब्लॉक स्तर के अधिकारियों ने एसडीएम के निर्देश के बाद भी इस मामले में आगे क्या कदम उठाया, जांच रिपोर्ट कहां तक पहुंची, और जब्त दवाओं के सैंपल लैबोरेट्री भेजे गए या नहीं—इस पर पूरी तरह से रहस्यमयी चुप्पी साध ली गई है।
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़, आखिर जिम्मेदार कौन?
एक्सपायरी और अवैध दवाइयां सीधे तौर पर इंसानी जिंदगी के लिए स्लो पॉइजन (धीमा जहर) का काम करती हैं। छूरिया के जागरूक नागरिकों का कहना है कि अगर इतनी बड़ी रिकवरी और स्वयं एसडीएम के आश्वासन के बाद भी रिषित मेडिकल स्टोर के मालिक को क्लीन चिट देने या मामले को हल्का करने का प्रयास किया जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर आम जनता की जान को खतरे में डालने जैसा है। प्रशासन का यह ढुलमुल रवैया यह साफ संकेत दे रहा है कि साठगांठ के जरिए रसूखदारों को बचाने और पूरे मामले की लीपा-पोती करने की पटकथा लिखी जा चुकी है। अब देखना यह है कि जिला स्तर के उच्च अधिकारी एसडीएम के उस बयान पर क्या संज्ञान लेते हैं या यह मामला भी फाइलों में ही दम तोड़ देगा।

Author: Sudha Bag

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