गेंदा टोला भाजपा मंडल में ‘दागियों’ की मनमानी? अतीत से वर्तमान तक संगीन आरोप, क्या डूब रही पार्टी की साख?

राजनीतिक संरक्षण में अनैतिक कार्यों की बाढ़? शीर्ष नेतृत्व की रहस्यमयी चुप्पी पर जनता और कार्यकर्ताओं का तीखा आक्रोश?
(जसीम कुरैशी की रिपोर्ट)
छूरिया, राजनीतिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार गेंदाटोला
स्थानीय क्षेत्र में राजनीतिक रसूख, पद और संगठन की धौंस दिखाकर चल रहे कथित अनैतिक कार्यों ने भारतीय जनता पार्टी की जमीनी साख को गंभीर संकट में डाल दिया है। गेंदा टोला भाजपा मंडल के अंतर्गत आने वाले कुछ प्रभावशाली नेताओं और पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर पूर्व से लेकर वर्तमान तक लगातार गंभीर और संगीन आरोप लगते आ रहे हैं। क्षेत्र की प्रबुद्ध जनता और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के बीच अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि ये विवादित चेहरे पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के बजाय, उसकी बरसों की कमाई हुई साख को अपने निजी हितों के लिए दिन-ब-दिन बर्बाद कर रहे हैं?
लगातार लगते रहे हैं संगीन आरोप, फिर भी नेतृत्व मेहरबान?
स्थानीय सूत्रों और पूर्व के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो गेंदा टोला क्षेत्र में पार्टी से जुड़े कुछ चेहरों का नाम विभिन्न विवादों और संदिग्ध गतिविधियों में आता रहा है। अतीत से लेकर वर्तमान तक, इन नेताओं पर सत्ता और संगठन के संरक्षण में अनैतिक कार्यों को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं। लेकिन सबसे बड़ा आश्चर्य और आक्रोश इस बात को लेकर है कि इतनी गंभीर शिकायतों, पुलिसिया चौखट तक पहुंचे मामलों और सार्वजनिक बदनामी के बावजूद, भाजपा के जिला व प्रदेश शीर्ष नेतृत्व ने इन ‘दागी’ चेहरों पर अब तक कोई दंडात्मक या अनुशासनात्मक संज्ञान क्यों नहीं लिया? क्या इन नेताओं को संगठन के किसी बड़े चेहरे का मूक अभयदान प्राप्त है?
सिद्धांतों और जमीनी हकीकत में भारी विरोधाभास
एक तरफ जहाँ भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मंचों से जीरो टॉलरेंस, कड़े अनुशासन और शुचिता की राजनीति का दावा करता है, वहीं गेंदा टोला भाजपा मंडल की यह जमीनी हकीकत उस दावे पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। दागी चेहरों को लगातार पदों पर बनाए रखने और उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने से पार्टी के उन निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ताओं में भारी हताशा है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन संगठन को सींचने में लगा दिया। दबी जुबान में कार्यकर्ता भी अब यह कहने लगे हैं कि यदि इन बदनाम चेहरों को जल्द से जल्द संगठन से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया गया, तो आगामी चुनावों में पार्टी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी क्या किसी बड़े समीकरण का हिस्सा?
क्षेत्रीय जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का सीधा सवाल है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि सब कुछ जानते हुए भी शीर्ष नेतृत्व मौन साधे बैठा है? क्या यह रहस्यमयी चुप्पी किसी अंदरूनी गुटबाजी का परिणाम है या फिर किसी बड़े राजनीतिक समीकरण को साधने की कोशिश? बहरहाल, गेंदा टोला क्षेत्र में पनपा यह आक्रोश अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। यदि समय रहते संगठन स्तर पर निष्पक्ष आंतरिक जांच और इन दागी नेताओं पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी की सांगठनिक साख पूरी तरह से मटियामेट होना तय माना जा रहा है?

Author: Sudha Bag

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