भीतरघात पर पार्टी नेतृत्व की चुप्पी से जमीनी कार्यकर्ताओं का टूटा मनोबल, संगठन की दोहरी नीति उजागर?
(जसीम कुरैशी की रिपोर्ट)
छूरिया राजनीति सुत्रो से प्राप्त जानकारी अनुसार हालिया चुनावों के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बड़े चेहरों पर कार्रवाई न होने से कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश और असंतोष पनप रहा है। चुनाव के दौरान खुल्लम-खुल्ला बगावत करने वाले और पार्टी उम्मीदवारों की हार की पटकथा लिखने वाले बड़े नेताओं पर डंडा चलाने के बजाय ?आलाकमान ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।
हाल ही में सामने आया चुम्मन ?साहू का मामला संगठन के भीतर अनुशासन के खोखले दावों की पोल खोल रहा है। पार्टी के भीतर से ही अब यह तीखी आवाज उठने लगी है कि अनुशासन की दुहाई सिर्फ बिना रसूख वाले और आम कार्यकर्ताओं? को डराने के लिए दी जाती है, जबकि गंभीर गुटबाजी और खुलेआम भीतरघात करने वाले रसूखदार नेताओं की बड़ी से बड़ी गलती को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है और पद से नवाजा गया है?
नाम न छापने की शर्त पर कई बूथ और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त ?करते हुए कहा, “हम दिन-रात पार्टी के झंडे उठाते हैं, लाठियां खाते हैं और जनता के बीच पसीना बहाते हैं। लेकिन जब बड़े नेता अपने निजी स्वार्थ में पार्टी की पीठ में छुरा घोंपते हैं और नेतृत्व उन पर कोई कड़ा एक्शन नहीं लेता, तो हमारा मनोबल पूरी तरह टूट जाता है। ऐसी दोहरी नीति रही, तो जमीनी स्तर पर पार्टी को कौन बचाएगा?”
राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि संगठन का यह ढुलमुल रवैया कांग्रेस की उस जमीनी हकीकत को उजागर करता है, जहाँ आज भी गुटबाजी और बड़े चेहरों का दबाव संगठन की नियमावली पर हावी है। यदि समय रहते बड़े बागियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आगामी चुनावों में जमीनी स्तर पर निष्ठावान कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और चुनावी जंग जीतना कांग्रेस के लिए एक नामुमकिन चुनौती बन जाएगा?
