शिक्षा का मंदिर कलंकित? छूरिया ब्लॉक में 4 शिक्षकों पर गाज, तीन पर FIR तो एक पर विभागीय जांच के बाद दोपहर12:00 बजे ट्रैक्टरों पर सवार होकर छूरिया थाने पहुंचे पैरी के ग्रामीण; शिक्षक राजेश नेताम पर FIR के विरोध में


*ग्राम पटेल और एसडीओपी में हुई तीखी बहस?*
(जसीम कुरैशी की रिपोर्ट)
छूरिया। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार शिक्षा को समाज का सबसे पवित्र पेशा माना जाता है और शिक्षकों को ‘ज्ञान का पुजारी’। लेकिन छत्तीसगढ़ के छूरिया ब्लॉक में बीते एक महीने के भीतर सामने आई शर्मनाक घटनाओं ने क्या शिक्षा विभाग की साख पर गहरा बट्टा लगा दिया है? महज 30 दिनों के भीतर ब्लॉक के चार अलग-अलग शिक्षकों पर बेहद गंभीर मामलों में कार्रवाई की गई है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इन चार मामलों में से तीन में पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज की है, जबकि एक मामले में विभागीय जांच के बाद शिक्षक को स्थानांतरित कर दिया गया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा के मंदिर के पुजारी ही इस प्रकार का कृत्य करेंगे, तो शिक्षा विभाग की साख का क्या होगा?ट्रैक्टरों में भरकर पहुंचे ग्रामीण, थाने में मचा हड़कंप?पैरी टोला का मामला अब और भी ज्यादा गरमाता जा रहा है। शिक्षक राजेश नेताम पर मारपीट के आरोप में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। लेकिन इस कार्रवाई से असंतुष्ट पैरी ग्राम के लोग और ग्राम पटेल, शिक्षक राजेश नेताम पर एफआईआर दर्ज होने के विरोध में दोपहर ठीक 12:00 बजे ट्रैक्टरों पर सवार होकर भारी संख्या में छूरिया थाने पहुंच गए। इतनी बड़ी तादाद में ग्रामीणों के अचानक पहुंचने से थाने का माहौल बेहद गरमा गया। इस दौरान ग्राम पटेल और एसडीओपी के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली? क्या ग्रामीणों का यह ट्रैक्टर मार्च और कड़ा विरोध पुलिसिया कार्रवाई की दिशा बदलेगा?दो शिक्षकों पर लगा छेड़छाड़ का गंभीर आरोप?ब्लॉक के दो अन्य अलग-अलग स्कूलों से भी मर्यादा को तार-तार करने वाले मामले सामने आए हैं। क्या छात्राओं से अभद्र व्यवहार मारपीट और छेड़छाड़ के आरोप में दो शिक्षकों के खिलाफ पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की है? इन घटनाओं से क्या पालकों और स्थानीय जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है? ?इसी कड़ी में तीसरा मामला शासकीय सामग्री के दुरुपयोग का है, जहाँ एक शिक्षिका द्वारा स्कूल की सरकारी पुस्तकें बेचने का सनसनीखेज मामला पुर्व में उजागर हुआ था क्या बच्चों को मुफ्त बांटी जाने वाली किताबों को बाजार या कबाड़ में खपा दिया गया? इस मामले में विभाग ने जांच के बाद शिक्षीका कों स्थानांतरित किया है।’शिक्षा के मंदिर के पुजारी’ करेंगे ऐसा कृत्य, तो विभाग का क्या?इन लगातार हो रही घटनाओं के बाद अब स्थानीय जनता और समाज का वर्ग शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहा है। लोगों का तीखा सवाल है कि अगर बच्चों का भविष्य संवारने वाले शिक्षक ही इस तरह के आपराधिक और अनैतिक कृत्यों में लिप्त रहेंगे, तो शिक्षा के मंदिर की पवित्रता कैसे बचेगी? क्या विभाग ऐसे तत्वों पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है? क्या दागी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया सच में जमीन पर दिखेगी या मामले को दबाव में दबा दिया जाएगा? यह आने वाला समय बताएगा?

Author: Sudha Bag

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *