(जसीम कुरैशी की रिपोर्ट)
छुरिया ?खुज्जी विधानसभा क्षेत्र ने प्रदेश की राजनीति को एक से बढ़कर एक दिग्गज नेता दिए हैं। इस माटी से निकलकर कई नेता बड़े-बड़े पदों पर आसीन हुए, लेकिन जब बात क्षेत्र की बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की आती है, तो ये तमाम दावे और वादे खोखले नजर आते हैं। इसका सबसे बड़ा जीवंत उदाहरण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) छुरिया है, जहां पिछले कई महीनों से जीवनदीप समिति की बैठक तक नहीं ?बुलाई गई है। स्वास्थ्य जैसे अति-संवेदनशील मामले पर जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की यह खामोशी अब क्षेत्र की जनता पर भारी पड़ रही है। आखिर जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कब तक होता रहेगा?अस्पताल की व्यवस्थाएं ध्वस्त, सुध लेने वाला कोई नहीं?जीवनदीप समिति का मुख्य उद्देश्य अस्पताल की छोटी-बड़ी समस्याओं को तुरंत दूर करना, स्थानीय स्तर पर फंड का सही प्रबंधन करना और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना होता है। नियमानुसार हर महीने या निश्चित अंतराल पर इसकी बैठक होना अनिवार्य है। लेकिन छुरिया स्वास्थ्य केंद्र में महीनों से यह बैठक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। बैठक न होने से अस्पताल प्रबंधन बेलगाम हो चुका है, जिससे मरीजों को दवाइयों से लेकर बुनियादी जांच के लिए भटकना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब समिति की बैठक ही नहीं होगी, तो अस्पताल की कमियां दूर कैसे होंगी?राजनीति चमकाने में मशगूल नेता, जनता के हक में पहल शून्य?क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव आते ही खुज्जी विधानसभा के नेता जनता के सामने हाथ जोड़कर वोट मांगने पहुंच जाते हैं। मंचों से विकास की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही जनता के हक में आवाज उठाने वाला कोई नजर नहीं आता। खुज्जी से कई नेता रसूखदार बने, पर छुरिया के इस इकलौते बड़े अस्पताल की सुध लेने की फुर्सत किसी को नहीं है। जनप्रतिनिधियों की इस उदासीनता के कारण गरीब मरीज निजी हॉस्पिटलों में लुटने को मजबूर हैं। क्या नेताओं की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव जीतने तक ही सीमित है?अधिकारियों ने साधी चुप्पी, जनता में भारी आक्रोशआखिर स्वास्थ्य के इतने गंभीर मामले पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी गंभीर क्यों नहीं हैं? जीवनदीप समिति की बैठक न होने के पीछे किसकी लापरवाही है? यह क्षेत्र में एक बड़ा यक्ष प्रश्न बना हुआ है। छुरिया क्षेत्र की जनता अब इस बदहाली के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में है। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी? दी है कि यदि जल्द ही जीवनदीप समिति की बैठक बुलाकर अस्पताल की कमियों को दूर नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों? की होगी ?
