खुज्जी मे अधिकृत प्रत्याशी की हार में भीतरघात की बड़ी भूमिका, बागियों पर कार्रवाई न होने से कार्यकर्ताओ मे असंतोष?


(जसीम कुरैशी की रिपोर्ट )
छूरिया राजनीतिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार खुज्जी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी की चुनावी हार के कारणों का अगर विश्लेषण करे तो गुटबाजी और भीतरघात का मामला प्रमुखता से सामने आता है। चुनावी आंकड़ों और जमीनी फीडबैक के अनुसार, पार्टी? के ही कुछ असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ सीधे तौर पर चुनाव मैदान में उतरने या परोक्ष रूप से विरोध करने के कारण कांग्रेस? के पारंपरिक वोट बैंक में बिखराव हुआ। इस भीतरघात को ही हार का मुख्य कारण माना जा सकता है। हालांकि, चुनाव परिणाम आने के बाद भी इन बागियों के खिलाफ संगठन द्वारा कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने से क्षेत्र के निष्ठावान ?कार्यकर्ताओं में असंतोष पनप रहा है।पारंपरिक वोटों का ध्रुवीकरण और हार का गणित रणनीतिक विश्लेषण के अनुसार, टिकट वितरण से असंतुष्ट होकर जिन नेताओं ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप? में चुनाव लड़ा या अन्य राजनीतिक मंचों का सहारा लिया, उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस के कोर वोटर्स में सेंध लगाई। खुज्जी के ग्रामीण और -शहरी क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस आंतरिक बिखराव का सीधा लाभ विरोधी खेमे को मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि यदि चुनाव के दौरान पार्टी के सभी धड़े एकजुट? होकर अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में काम करते, तो इस सीट के परिणाम भिन्न हो सकते थे।अनुशासन समिति के रुख पर उठ रहे सवाल पार्टी ?के भीतर इस समय सबसे बड़ा चर्चा का विषय अनुशासन समिति का सुस्त रवैया है। आमतौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले नेताओं को तत्काल निष्कासित या निलंबित किया जाता है, लेकिन खुज्जी के संदर्भ में ऐसा देखने को नहीं मिला है। इसके विपरीत, चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी को नुकसान पहुँचाने वाले कुछ चेहरों की संगठन? के कार्यक्रमों और बैठकों और पार्टी के पदाधिकारि बन्ने से निरंतर मौजूदगी देखी जा रही है। इस स्थिति ने उन कार्यकर्ताओं को अचंभित कर दिया है जिन्होंने पूरी निष्ठा के साथ अधिकृत प्रत्याशी के चुनाव प्रबंधन ?की जिम्मेदारी संभाली थी।स्थानीय संगठन के मनोबल पर पड़ रहा विपरीत असर जमीनी स्तर पर सक्रिय ?ब्लॉक और बूथ प्रभारियों का मानना है कि अनुशासनहीनता के प्रति इस तरह के नरम रुख (मेहरबानी) से संगठन का ढांचा कमजोर होता है। कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश? जा रहा है कि पार्टी के आधिकारिक फैसलों का विरोध करने पर भी कोई दंडात्मक ?कार्रवाई नहीं होती। खुज्जी विधानसभा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की मांग है कि भविष्य के चुनावों में संगठन ?की साख बनाए रखने के लिए भितरघात करने वाले तत्वों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति को रोका जा सके ?

Author: Sudha Bag

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