छूरिया राजनीतिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार राजनांदगांव जिले की हाईप्रोफाइल खुज्जी विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 77 में कांग्रेस के भीतर एक बार फिर अंतर्विरोध और असंतोष का ज्वालामुखी सुलग उठा है। चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों, भीतरघात और अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ बगावत करने वाले बड़े नेताओं और छोटे कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय जमीनी कार्यकर्ताओं का खुला आरोप है कि कांग्रेस आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामले में दोहरा मापदंड अपना रहा है, जिससे निष्ठावान कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है।बड़े नेताओं को ‘अभयदान’, छोटों पर तुरंत गाज खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के कई ?वरिष्ठ और जमीनी कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि खुज्जी हमेशा से कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है। लेकिन जब कोई बड़ा रसूखदार नेता निजी स्वार्थ या टिकट न मिलने के कारण पार्टी से बगावत करता है, निर्दलीय प्रत्याशी? के रूप में अंदरूनी रूप से या खुले तौर पर अधिकृत प्रत्याशी को हराने के लिए काम करता है, तो संगठन उसके खिलाफ कार्रवाई करने में सालों लगा देता है। कई बार तो ऐसे बड़े चेहरों को सिर्फ नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है और बाद में उनकी आसानी से ‘घर वापसी’ भी करा ली जाती है।इसके विपरीत, ?यदि क्षेत्र का कोई छोटा कार्यकर्ता, बूथ स्तर का पदाधिकारी या स्थानीय नेता जरा सा भी असंतोष जताता है या किसी जायज मुद्दे पर अपनी आवाज उठाता है, तो उसे बिना किसी ठोस सुनवाई या पक्ष रखने का मौका दिए तुरंत छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।भीतरघात की जांच में देरी से बढ़ा असंतोषकार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पूरे पांच साल धूप-बरसात में जमीन पर पसीना बहाते हैं, पार्टी की नीतियों को मतदाताओं तक पहुंचाते हैं और विपरीत परिस्थितियों में भी संगठन? का झंडा थामे रहते हैं। लेकिन जब अनुशासन और मान-सम्मान की बात? आती है, तो बड़े नेताओं के रसूख के आगे नियम-कायदे शिथिल कर दिए जाते हैं। कार्यकर्ताओं ने तीखा सवाल दागते हुए पूछा है?आखिर कांग्रेस आलाकमान बड़े बागियों पर कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है? खुज्जी के बड़े बागियों पर कार्रवाई कब होगी?”संगठन के सामने अनुशासन का बड़ा संकट राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खुज्जी विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 77 में कांग्रेस की इस अंदरूनी खींचतान और कार्रवाई में भेदभाव की नीति का सीधा असर आने वाले समय में संगठन की मजबूती पर पड़ेगा। डिजिटल और सोशल मीडिया के इस दौर में अब जमीनी कार्यकर्ता भी अपने हक की आवाज मुखरता ?से उठा रहे हैं। यदि प्रदेश कांग्रेस संगठन ने समय रहते अपनी इस नीति में सुधार नहीं किया और सभी के लिए ‘एक पार्टी, एक नियम’ लागू नहीं किया, तो आगामी दिनों में खुज्जी क्षेत्र में भीतरघात और असंतोष की यह चिंगारी बड़े राजनीतिक विस्फोट का रूप ले सकती है?
