रायपुर, 20 सितंबर 2026
भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त सामाजिक न्याय, समान अवसर, प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण व्यवस्था की रक्षा तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर आज अंबेडकर चौक से प्रारंभ हुई इस रैली में राज्य के विभिन्न जिलों से आए 10,000 से अधिक युवा, विद्यार्थी, कर्मचारी, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी एवं समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। रैली के माध्यम से राज्यपाल महोदय के नाम एक विस्तृत 20 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर राज्य शासन का ध्यान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों से जुड़े लंबित मुद्दों की ओर आकर्षित किया गया।
जेन-ज़ी युवा वर्ग ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने सामाजिक रूप से वंचित एवं ऐतिहासिक रूप से पिछड़े वर्गों को सामाजिक न्याय, समान अवसर एवं सम्मानजनक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अनेक संवैधानिक प्रावधान किए हैं, किन्तु आज भी इन वर्गों से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विषय लंबित हैं। इन्हीं विषयों के समाधान तथा संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से यह रैली आयोजित की गई। रैली में उपस्थित युवाओं एवं सामाजिक प्रतिनिधियों ने कहा कि सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व, आजीविका, जनजातीय अधिकार एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सरकार को प्रभावी एवं समयबद्ध कदम उठाने चाहिए।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए पदोन्नति में आरक्षण नियम-5 को पुनः अधिसूचित कर लागू किया जाए तथा सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के अनुरूप पदोन्नति में आरक्षण तत्काल प्रभाव से प्रदान किया जाए। साथ ही विभिन्न विभागों में बिना आरक्षण रोस्टर के की जा रही पदोन्नतियों पर रोक लगाई जाए। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 एवं आरक्षण नियम, 1998 का पूर्ण पालन सुनिश्चित करते हुए आरक्षण रोस्टर का नियमित संधारण एवं अद्यतन किए जाने की मांग भी की गई।
ज्ञापन में राज्य गठन से अब तक लंबित बैकलॉग पदों की जानकारी सार्वजनिक करने तथा विशेष भर्ती अभियान चलाकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के रिक्त पदों को तत्काल भरने की मांग की गई है। सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के उद्देश्य से OBC वर्ग को 27 प्रतिशत तथा SC वर्ग को 13 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की मांग भी उठाई गई। युवाओं ने कहा कि प्लेसमेंट, आउटसोर्सिंग, संविदा एवं अन्य बैकडोर भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से आरक्षण व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है, इसलिए ऐसी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आरक्षण नियमों के अनुरूप भर्ती सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही संविदा, आउटसोर्स एवं प्लेसमेंट कर्मचारियों के नियमितीकरण से पूर्व सामाजिक प्रतिनिधित्व का परीक्षण एवं मूल्यांकन किए जाने की मांग की गई।
रैली के माध्यम से अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) एवं जनजातीय उपयोजना (TSP) के बजट के संरक्षण, पारदर्शी उपयोग एवं प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि इन निधियों के निर्धारण, आबंटन एवं उपयोगिता के लिए पृथक विधायी व्यवस्था बनाई जाए तथा इनके बजट का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के युवाओं के स्वरोजगार, कौशल विकास एवं आजीविका सशक्तीकरण कार्यक्रमों के लिए निर्धारित किया जाए। संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत प्राप्त राशि का उपयोग केवल जनजातीय विकास एवं कल्याण के लिए किए जाने तथा कार्ययोजना निर्माण में जनजातीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
ज्ञापन में पेसा (PESA) एवं वन अधिकार अधिनियम (FRA) का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभाओं एवं स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप सशक्त बनाने तथा शासन, प्रशासन, आयोगों, बोर्डों एवं नीति-निर्माण संस्थाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग का समुचित सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की गई। साथ ही पदोन्नति, गोपनीय चरित्रावली एवं अन्य सेवा संबंधी मामलों में आरक्षित वर्गों को उपलब्ध रियायतों का पालन करने तथा प्रतिकूल टिप्पणियों पर रोक लगाने का आग्रह किया गया।
रैली में यह भी मांग की गई कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि बढ़ाई जाए तथा उसका समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए। विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में सामाजिक न्याय सुरक्षा तंत्र एवं प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित की जाए। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आरक्षण अधिनियम, 1994 की धारा 19 के अंतर्गत प्रतिवर्ष विधानसभा में आरक्षण, भर्ती, बैकलॉग एवं सामाजिक प्रतिनिधित्व संबंधी विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की मांग भी की गई।
जेन-ज़ी युवा वर्ग ने अनुसूचित जनजाति भूमि से संबंधित प्रावधानों की समीक्षा, उच्च न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर व्यापक संवैधानिक एवं नीतिगत विमर्श, जाति प्रमाण-पत्र निर्माण प्रक्रिया के सरलीकरण तथा राज्य की अनुमति से संचालित निजी उद्योगों एवं संस्थानों में स्थानीय छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को रोजगार में आरक्षण एवं प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।
रैली के आयोजकों ने कहा कि ज्ञापन में उल्लिखित कुछ अत्यावश्यक विषयों पर एक माह के भीतर तथा शेष मांगों पर तीन माह के भीतर राज्य शासन द्वारा की गई कार्यवाही से अवगत कराने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय-सीमा में मांगों पर सकारात्मक एवं ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है तो संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप राज्यव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा तथा आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र से पूर्व बड़े स्तर पर आरक्षण बचाओ अभियान आयोजित किया जाएगा।
जेन-ज़ी युवा वर्ग ने कहा कि आज बस्तर से लेकर सरगुजा तक तथा राज्य के विभिन्न जिलों से आए हजारों युवाओं, विद्यार्थियों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों की सहभागिता यह दर्शाती है कि सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकार, प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण व्यवस्था से जुड़े प्रश्न आज भी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस सफल, शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आयोजन में शामिल सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्य शासन से ज्ञापन में उल्लिखित मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक निर्णय लेने की अपेक्षा व्यक्त की।
