(जसीम कूरैशी की रिपोर्ट)
: छूरिया सुत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार दिन के उजाले से लेकर रात अंधेरे तक वन विभाग की नाक के नीचे से कट रहे जंगल, रक्षक बने भक्षक?बेशकीमती इमारती लकड़ियों का बेखौफ परिवहन; तस्कर सक्रिय, वन विभाग मौन जंगलों से इन दिनों बेशकीमती इमारती लकड़ियों की अवैध कटाई और बेखौफ परिवहन का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि वनों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला वन विभाग इस पूरी हलचल से अनजान बनकर मौन साधे बैठा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिन-दहाड़े और रातों के अंधेरे में ट्रैक्टरों और ट्रकों के जरिए कीमती लकड़ियां पार कर रहे हैं, लेकिन मुख्य मार्गों और वन चौकियों पर तैनात अमला हाथ पर हाथ धरे बैठा है।इलेक्ट्रॉनिक आरी से चंद मिनटों में साफ हो रहे जंगल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लकड़ी तस्कर अब पारंपरिक कुल्हाड़ियों को छोड़कर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक आरी (आरा मशीनों) का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे घने जंगलों के बीच बड़े और पुराने पेड़ों को चंद मिनटों में काटकर उनके टुकड़े बना दिए जाते हैं। सागौन, बोईर कौहा और जैसी प्रतिबंधित श्रेणियों की बेशकीमती लकड़ियों को मुख्य रूप से निशाना बनाया जा जा रहा है, जिनकी बाजार में कीमत लाखों रुपये है।जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग का मैदानी और ग्रामीण अमला सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदकर बैठा है। जब भी ग्रामीण इस संबंध में शिकायत करते हैं, तो कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकता निभाकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। नाम न छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने बताया कि तस्करों और विभाग के कुछ अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ के चलते यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। मुख्य सड़कों पर होने वाले इस परिवहन को रोकने के लिए नाकों पर कोई सख्त चेकिंग नहीं की जा रही है।पर्यावरण और राजस्व को भारी नुकसानइस बेखौफ तस्करी के कारण एक तरफ जहां पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है। यदि समय रहते वन विभाग की इस कुंभकर्णी नींद को नहीं तोड़ा गया, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र के जंगल पूरी तरह मैदान में तब्दील हो जाएंगे। स्थानीय नागरिकों ने उच्च अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने और दोषी अधिकारियों व तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है?
