ख़बर छत्तीसगढ़ से जसीम कुरैशी की रिपोर्ट
छूरिया राजनांदगांव।
जिला पंचायत सदस्य एवं जिला कांग्रेस कमेटी राजनांदगांव (ग्रामीण) के महामंत्री महेन्द्र यादव ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से छात्र अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे थे, लेकिन उनकी मांगों को सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया। लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज़ को इस प्रकार बलपूर्वक दबाने का प्रयास अत्यंत निंदनीय है और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
महेन्द्र यादव ने कहा कि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष माननीय राहुल गांधी छात्रों के समर्थन में डटकर खड़े रहे और उनकी आवाज़ को सड़क से संसद तक बुलंद किया। उनका कहना है कि राहुल गांधी तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के विरुद्ध की गई पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं थी। लोकतंत्र में जनता की आवाज़ उठाने वालों की बात सुनी जानी चाहिए, न कि उन्हें दबाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने छात्रों की मांगों का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास किया। लेकिन अंततः सत्य और जनशक्ति की जीत हुई। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस बात का संदेश है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सबसे बड़ी होती है।
महेन्द्र यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी छात्रों, युवाओं, किसानों और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च होती है। यदि केंद्र सरकार जनता की अपेक्षाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों की उपेक्षा करती रही, तो आने वाले समय में देश की जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपना निर्णय सुनाएगी। जनता अहंकार और जनविरोधी नीतियों का जवाब संविधान और लोकतंत्र की ताकत से देगी।
“सत्य को दबाया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता। सत्ता का अहंकार क्षणिक होता है, जबकि जनता का संघर्ष और लोकतंत्र की शक्ति अंततः इतिहास रचती है।”
