- पूर्व? विधायक और विधायक समर्थक आमने-सामने, ब्लॉक अध्यक्ष पर उठे सवाल, जिला नेतृत्व की चुप्पी से बढ़ी सियासी हलचल
(ख़बर छत्तीसगढ़ से जसीम कूरैशी)
छूरिया राजनीतिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार राजनांदगांव। जिले के खुज्जी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत छुरिया में आयोजित जिला ग्रामीण कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक उस समय विवादों के केंद्र में आ गई, जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच खुलकर गुटबाजी सामने आ गई। संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से बुलाई गई बैठक आरोप-प्रत्यारोप, तीखी बहस और नेतृत्व को लेकर उठे सवालों के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।
बैठक के दौरान पूर्व विधायक समर्थक और वर्तमान विधायक समर्थक नेताओं के बीच संगठन की कार्यप्रणाली, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और नेतृत्व की शैली को लेकर जमकर नोकझोंक हुई। दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर संगठन को कमजोर करने और पार्टी हितों की अनदेखी करने के आरोप लगाए। माहौल इतना गर्म हो गया कि बैठक का मूल उद्देश्य पीछे छूट गया और गुटबाजी ?पूरी तरह खुलकर सामने आ गई।
बैठक में हाल ही में नियुक्त किए गए ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर भी तीखा विवाद देखने को मिला। विधायक समर्थक नेताओं ने आरोप लगाया कि ब्लॉक अध्यक्ष पार्टी के? कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे हैं और संगठनात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं, ब्लॉक अध्यक्ष के समर्थकों ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर संगठन में हाशिए पर धकेलने की कोशिश की जा रही है तथा उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान कई नेताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की, लेकिन विवाद बढ़ने के बावजूद जिला नेतृत्व की ओर से कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया। इस कारण जिला कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका और संगठन पर उनकी पकड़ को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा रही कि यदि समय रहते मतभेदों को नहीं सुलझाया गया तो इसका असर आगामी चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की यह अंदरूनी खींचतान भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। विपक्ष के लिए यह अवसर है कि वह कांग्रेस की अंदरूनी कलह को जनता के बीच प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि खुज्जी कांग्रेस की कमान वास्तव में किसके हाथ में है? क्या संगठन बढ़ती गुटबाजी पर नियंत्रण कर पाएगा, या फिर अंदरूनी संघर्ष आगामी चुनावों में कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ा देगा? फिलहाल इस बैठक ने यह साफ संकेत दे दिया है कि खुज्जी कांग्रेस में सब कुछ सामान्य नहीं है और संगठन के भीतर मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं।
