गोंड आदिवासी समाज भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य हिस्सा : जनपद अध्यक्ष संजय सिन्हा


(जसीम कूरैशी की की रिपोर्ट)
छुरिया : समीपस्थ ग्राम बोईरडीह मे आदिवासी समाज द्वारा भगवान बुढ़ा देव जी के प्राणप्रतिष्ठा उत्सव तृतीय वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाई गई,इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संजय कुमार सिन्हा अध्यक्ष जनपद पंचायत छुरिया,श्रीमती सीमा यादव,जनपद सदस्य,राजेश्वर ध्रुव मौजूद रहे । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि गोंड आदिवासी समाज भारत के प्राचीनतम और सबसे बड़े आदिवासी समाजों में से एक है। यह समाज मुख्य रूप से मध्य भारत के क्षेत्रों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा में निवास करता है। गोंड समाज अपनी समृद्ध संस्कृति, प्रकृति-प्रेम और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है।
“गोंड” शब्द का अर्थ माना जाता है पहाड़ों में रहने वाला। इतिहास में गोंड राजाओं ने कई क्षेत्रों पर शासन किया, जिनमें गढ़ा-मंडला, चांदा और देवगढ़ प्रमुख रहे हैं। गोंड समाज ने अपनी स्वतंत्र पहचान, शासन व्यवस्था और परंपराओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखा। गोंड समाज की संस्कृति अत्यंत रंगीन और जीवंत है। नाच-गान, लोकगीत, मांदर-ढोल, और पारंपरिक वेशभूषा इस समाज की पहचान हैं। कर्मा, फाग, पोला, हरेली जैसे पर्व सामूहिकता और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाते हैं।
गोंड चित्रकला (Gond Art) आज विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसमें प्रकृति, पशु-पक्षी और लोककथाओं को अनोखे प्रतीकों के माध्यम से दर्शाया जाता है।
गोंड आदिवासी समाज का जीवन जंगल, जल और जमीन से गहराई से जुड़ा हुआ है। पेड़-पौधे, नदी-नाले और पहाड़ इनके लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनदाता हैं। इसी कारण यह समाज पर्यावरण संरक्षण का स्वाभाविक संरक्षक रहा है।
गोंड समाज में आपसी सहयोग, समानता और सामूहिक निर्णय की परंपरा रही है। परिवार और ग्राम समाज एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी होते हैं। बुजुर्गों का सम्मान और परंपरागत ज्ञान का महत्व आज भी बना हुआ है।
आधुनिक समय में गोंड समाज शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अब भी कई चुनौतियाँ मौजूद हैं। शिक्षा का प्रसार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना आज की प्रमुख आवश्यकता है। गोंड आदिवासी समाज भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य हिस्सा है। यह समाज हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ संतुलन, सादगी और सामूहिकता में ही सच्चा विकास छिपा है। आवश्यकता है कि गोंड समाज की संस्कृति, अधिकार और सम्मान को सुरक्षित रखते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया। इस अवसर पर भीषम शोरी सरपंच,चंद्रशेखर मंडलोई,सियाराम सिन्हा,महासिंग,सुफल शोरी, कुमाल नेताम,मोती मंडावी,संतोष सिन्हा मौजूद रहे ।

Author: Sudha Bag

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