छुरिया (जसीम कुरैशी की रिपोर्ट) ।अंबागढ़ चौंकी ब्लाक के वनांचल ग्राम टाटेकसा में स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बच्चों ने शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में अपने गुरुजनों का किया सम्मान मुख्य अतिथि के बतौर डोंगरगांव के ख्यातिलब्ध साहित्यकार, रंगकर्मी, फिल्मी गीतकार, मंच संचालक, शिक्षाविद डॉ गजेन्द्र हरिहारनो दीप उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि छुरिया के ख्यातिलब्ध कवि,लेखक,उदघोषक, साहित्यकार,शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कुरेटी दिलेर रहे।
कार्यक्रम की शुरूवात मां सरस्वती के प्रतिमा पर पूजा आराधना कर किया गया। बच्चों के द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। राज्य गीत के बाद अतिथियों का स्वागत किया गया। कक्षा नवमीं की छात्रा कु.आंचल,कु. लक्ष्मी,कु. ज्योति,कु. अर्पिता एवं कु. वीणा देवी ने मनमोहक स्वागत गीत-नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियाँ बटोरी। पश्चात बच्चों के द्वारा अपने गुरुजनों को श्रीफल एवं कलम भेंटकर विद्यालय के सभी शिक्षकों का सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के बतौर उपस्थित डाॅ.गजेन्द्र हरिहारनों का स्वागत संस्था के प्राचार्य उत्तम कुमार वर्मा एवं वरिष्ठ व्याख्याता गणपत नेताम ने साल और श्री फल से किए,उसी संस्था में पदस्थ श्री हरिहारनों के द्वारा पढ़ाया हुआ छात्र उद्धव ठाकुर व्याख्याता ने अपने गुरु हरिहारनों जी का स्वागत अंग वस्त्र, डायरी, पेन एवं मोमेंटो भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। उस समय गुरु और शिष्य की प्रगाढ़ प्रेम देखते बन रहा था।विशेष अतिथि दिनेश कुरेटी दिलेर का विद्यालय के छात्रों द्वारा शाल,श्रीफल एवं गुलदस्ता भेंटकर सम्मान किया गया। पूर्व प्रभारी प्राचार्य गनपत नेताम ने गुरु और शिष्य की महिमा को बखान किए उन्होंने बताए कि जिस स्कूल में हम विद्या ग्रहण करते हैं वहां शिक्षक छात्र को संस्कारवान, ज्ञानवान बनाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि इस कार्य में शिक्षक की भूमिका अहम होती है।आज की जो शिक्षा पद्धति है वो अर्थ परक हो गई है। भारत आज विकसित राष्ट की ओर अग्रसर है ऐसी स्थिति में शिक्षकों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाता है। विशिष्ट अतिथि साहित्यकार शिक्षक, कवि, शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कुरेटी दिलेर ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में आरुणि की गुरुभक्ति को विस्तार से बताकर कहा कि गुरु जो कह दे टालता नहीं था । उन्होंने आगे कहा कि अच्छी शिक्षा के साथ- साथ अच्छा संस्कार भी जरुरी है। नहीं तो हम देखते है जो माता -पिता रोजी- मजदूरी कर,पैतृक जमीन बेचकर अपने बच्चे को पढ़ाया- लिखाया वही बच्चा बड़े होकर विदेश में नौकरी कर रहा है और इधर वही माता- पिता अनाथ आश्रम में रहते है तो फिर ऐसे शिक्षा एवं संस्कार का कोई औचित्य नहीं है। गीतकार श्री कुरेटी ने स्व रचित शानदार मौलिक गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चाँद लगाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्था के प्राचार्य उत्तम कुमार वर्मा ने कबीरदास के दोहे से अपनी बात की शुरूवात की गुरु और भगवान साथ खड़े रहते हैं उसी समय शिष्य आता है और दुविधा में पड़ जाता है कि मैं पहले भगवान का प्रणाम करूं या गुरु का प्रणाम करूँ तब भगवान बताते हैं कि बेटा पहले प्रणाम अपने गुरु का करो जो आपको इस योग्य बनाया एवं भगवान के बारे में बताया। इसलिए गुरु भगवान से भी बढ़कर है। मुख्य अतिथि बतौर साहित्यकार रंगकर्मी फिल्मी गीतकार शिक्षाविद डाॅ. गजेन्द्र हरिहारनो दीप ने अपने उद्बोधन में बेटी के ऊपर शानदार कविता सुनाया ।बेटी मन मया के नित खदान होथे न के ऊपर खूब ताली बटोरे। उन्होंने कहा कि समय के धारा में सब बह जाया करते हैं, कुछ ही लोग होते हैं जो इतिहास बनाया करते हैं उन्होंने कहा कि कौन कहता है तुम्हे भगवान होना चाहिए, आदमी को यारो इंसान होना चाहिए। उन्होंने कहा जीवन अगर कोई कठिन कार्य है तो वो है सरल होना जिसने सरल होना सीख लिया उसके लिए कोई भी कार्य नामुमकिन नहीं है। उन्होंने बच्चों को शिष्टाचार एवं अनुशासन का पाठ पढ़ाया। कार्यक्रम में व्याख्याता आर.बी.सलामे,उद्धव ठाकुर,शिशुपाल सिंह कंवर, वाणी विलास देवांगन,रोशनी कोटांगले,शेख नाजनी, किरन साहू एवं धारिका साहू ने सभा को संबोधित कर बच्चों को आशीष वचन दिया। कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए एक पेड़ मां के नाम के तहत मुख्य अतिथि,विशेष अतिथि,प्राचार्य एवं व्याख्याताओं ने फलदार पेड़ आम पौधा का वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम का संचालन बारी-बारी से व्याख्याता उद्धव ठाकुर एवं छात्र-छात्राओं ने तथा आभार प्रदर्शन उद्धव ठाकुर ने किया।इस अवसर पर विद्यालय के समस्त व्याख्याता,स्कूल स्टाफ एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
