👉ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी का लापरवाही, खाद और दवाई का किसानों को नहीं किया वितरण
जसीम कूरैशी कि रिपोर्ट
छुरिया। जैविक कृषि एक ऐसी कृषि प्रणाली है जो रासायनिक उर्वरकों कीटनाशकों और अन्य सिंथेटिक पदार्थों के उपयोग से बचती है साथ ही मनुष्य के स्वास्थ्य को बनाए रखती है। इसलिए सरकार जैविक खेती की ओर अग्रसर होना चाहती हैं जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है भारत सरकार का मनसा है कि जैविक खेती हर किसान करें ताकि पर्यावरण को नुकसान ना हो और मिट्टी और पानी की गुणवत्ता में सुधार हो जिससे मनुष्य को स्वस्थ भोजन उपलब्ध हो। जैविक खेती से उत्पादित भोजन स्वादिष्ट लगता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। विटामिन खनिज व पोशाक तत्व उच्च मात्रा में मिलता है ।जैविक खेती से उत्पादित अनाज को लंबे समय तक रख सकते हैं ।पशुधन की भी सुरक्षा होती है धरती मां को भी विसमुक्त कर सकते हैं ।जैविक खाद जमीन को बंजर होने से बचाती है। सरकार की बहुत बढ़िया योजना को यहां का कृषि विभाग और अधिकारी पलीता लगा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार जैविक खेती परंपरागत कृषि विकास योजना अंतर्गत 2023_24 में विकासखंड के ग्राम पंचायत गेरू घाट और आश्रित ग्राम मंगिया टोला में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लाखों रुपए की जैविक खाद एवं जैविक दवाई ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को दिया गया था। जिसे किसानों को वितरण करना था। जो नहीं किया।हालत यह है कि खाद और दवाई अंतिम सांस गिन रहा है मंगिया टोला के एक किसान शंकर पटौदी के घर के छपरी में दर्जनो बोरी जैविक खाद पड़ा पड़ा खराब हो रहा है वहीं सैकड़ों की संख्या में जैविक दवाई का बोतल किसान लखन मंडावी के बाड़ा में पड़ा हुआ है। किसानों का माने तो ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी हेमंत कुमार वैष्णव ,किसानों को जैविक खाद और दवाई वितरण करने के लिए डंप करवाया था। जिसे आज पर्यंत तक किसी भी किसान को जैविक खाद और जैविक दवाई का वितरण इन्होंने नहीं किया है। सरकार के मनसा पर पानी फेरते हुए यह अधिकारी बेखौप है ।इस प्रकार के लापरवाही से सरकार का बदनामी तो है साथ ही किसानों का नुकसान के साथ जैविक खेती की ओर झुकाव में कमी भी आएंगी। वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी मैडम एस. बी.मसिया से जैविक खाद और दवाई के संबंध में जानकारी लिया गया ।उनका कहना है कि हम यहां से कृषि विस्तार अधिकारी reo को दे देते हैं उसके बाद हमारा कोई जिम्मेदारी नहीं है कि वह किसको बांट रहे हैं या नहीं बांट रहे हैं। इस तरह से एक वरिष्ठ जिम्मेदार अधिकारी की जवाब सुनकर हैरान तो हुआ लेकिन आश्चर्य भी है की विष्णु देव साय सरकार का सुशासन पर अधिकारी बेखौप, बेलगाम और गैरजिम्मेदाराना हैं। ऐसे अधिकारी के चलते,भारत सरकार के करोड़ों की योजना धरातल मे कार्य रूप में परणीत नहीं हो पा रहा है।
