संगठन ने कुछ समय पूर्व तय की थी नेता प्रतिपक्ष चुनने की प्रक्रिया, लेकिन अंतिम घोषणा न होने से कार्यकर्ताओं और पार्षदों में बढ़ी बेचैनी?
जसीम कुरैशी की रिपोर्ट
छुरिया राजनीति सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार नगर पंचायत में कांग्रेस संगठन द्वारा नेता प्रतिपक्ष चुनने की कवायद को लंबा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक परिणाम घोषित नहीं किए जा सके हैं। संगठन की इस लेटलतीफी और रहस्यमयी चुप्पी ने अब स्थानीय राजनीति में कई गंभीर सवालों और अंदरूनी गुटबाजी को जन्म देना शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व कांग्रेस संगठन की ओर से नगर पंचायत में विपक्ष की कमान सौंपने के लिए दावेदारों और पार्षदों से रायशुमारी की प्रक्रिया पूरी की गई थी। उस दौरान माना जा रहा था कि जल्द ही नेता प्रतिपक्ष के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के हफ्तों बाद भी परिणाम ‘अधर’ में लटका हुआ है।
भीतरखाने में बढ़ी गुटबाजी, कार्यकर्ताओं में निराशा
नामों की घोषणा में हो रही देरी के कारण कांग्रेस के भीतरखाने में खींचतान तेज हो गई है। अलग-अलग गुट अपने-अपने चहेते नेताओं को इस पद पर बैठाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। परिणाम न आने की वजह से न सिर्फ दावेदारों के सब्र का बांध टूट रहा है, बेचैनी और गुटबाजी लगातार बढ़ती जा रही है। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस सुस्ती के कारण नगर पंचायत में सत्तापक्ष के सामने विपक्ष की भूमिका कमजोर पड़ रही है।
👉राजनीतिक गलियारों में उठ रहे ये बड़े सवाल:
- फैसले में देरी क्यों? जब चयन की सारी प्रक्रिया और रायशुमारी पहले ही पूरी हो चुकी है, लेकिन आखिर लिफाफा खोलने या नाम का आधिकारिक ऐलान करने में किसे और क्यों हिचकिचाहट हो रही है?
- 👉क्या बड़े नेताओं का है दबाव? राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि क्या किसी खास नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है या फिर शीर्ष नेताओं के आपसी तालमेल की कमी आड़े आ रही है?
- 👉विपक्ष की भूमिका पर असर: नेता प्रतिपक्ष का पद खाली रहने या स्पष्ट नेतृत्व न होने से नगर की जनता की समस्याओं को उठाने में पार्टी पिछड़ रही है, जिसका सीधा फायदा सत्तापक्ष को मिल रहा है?
