👉छोटे कार्यकर्ताओं पर 6 साल का निष्कासन जिला जनपद लड़ने वाले बड़े भितरघातियों को मलाईदार पद; कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष?
(जसीम कुरैशी की रिपोर्ट)
छूरिया राजनीतिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार नगर पंचायत चुनाव के बाद छूरिया कांग्रेस में भीतर ही भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब ज्वालामुखी का रूप लेती जा रही है। पार्टी नेतृत्व द्वारा हाल ही के 2025 में कि गई अनुशासनात्मक कार्रवाई ने संगठन ?के भीतर दोहरे मापदंड को पूरी तरह उजागर कर दिया है, जिससे निष्ठावान कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। चर्चा है कि पार्टी का यह पक्षपातपूर्ण रवैया आगामी चुनावों में कांग्रेस के लिए भारी नुकसान का सबब बन सकता है।छोटे कार्यकर्ताओं पर गिरी गाज, छह साल के लिए बाहरसूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, छूरिया नगर पंचायत चुनाव में पार्टी के अधिकृत पार्षद प्रत्याशियों और अध्यक्ष पद के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने वाले छोटे व जमीनी कार्यकर्ताओं पर कांग्रेस पार्टी ?ने तत्काल प्रभाव से छह वर्ष के लिए निष्कासन की कड़ी कार्रवाई की है। अनुशासनहीनता के नाम पर छोटे कार्यकर्ताओं को बिना किसी बड़े कारण के पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।बड़े भितरघातियों पर मेहरबानी, बगावत कर चूनाव लड़ने के बाद भी मिले ऊंचे पद पार्टी कार्यकर्ताओं में सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात को लेकर है कि जिन बड़े और रसूखदार नेताओं ने पर्दे के पीछे रहकर या खुलेआम पार्टी विरोधी काम किया, उन पर कार्रवाई करने की हिम्मत संगठन ?नहीं जुटा पाया। उल्टा, बड़े भितरघातियों को सजा देने के बजाय उन्हें नए मलाईदार पदों से सुसज्जित कर पद से नवाजा गया है। पार्टी का यह दोहरा रवैया कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रहा है।बड़ा सवाल: जिला व जनपद चुनाव के बागियों पर कब होगी कार्रवाई?कार्यकर्ताओं के बीच अब यह बड़ा सवाल तेजी से गूंज रहा है कि जिला पंचायत और जनपद पंचायत के चुनावों में भी जिन नेताओं ने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ खुलकर चुनाव लड़ा और पार्टी को नुकसान पहुंचाया, उन पर आखिरकार पार्टी कब कार्रवाई करेगी? छोटे कार्यकर्ताओं का कहना है कि क्या अनुशासन का डंडा सिर्फ कमजोरों पर चलेगा या फिर जिला-जनपद स्तर के बड़े बागियों को भी उनके किए की सजा मिलेगी? इस चुभते सवाल ने संगठन की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।कार्यकर्ताओं का टूटा हौसला, संगठन को भुगतना पड़ सकता है खामियाजा दिन-रात झंडा उठाने वाले और जमीन पर पसीना बहाने वाले छोटे कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी में अब वफादारी की कोई कीमत नहीं बची है। नियम सिर्फ कमजोरों के लिए हैं, जबकि रसूखदारों की हर बगावत माफ है। कार्यकर्ताओं के उत्साह में आई यह भारी कमी साफ इशारा कर रही है कि अगर समय रहते इस डैमेज को कंट्रोल नहीं किया गया, तो आगामी बड़े राजनीतिक मुकाबलों में कांग्रेस को इसका बड़ा सियासी नुकसान उठाना पड़ सकता है?
