(जसीम कुरैशी की रिपोर्ट)
छूरिया जनता त्रस्त, सरकार उत्सव में मस्त!छूरिया ब्लाक में दिनांक: 17 सितम्बर 2026 को जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता प्रकाश शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में दीप प्रज्वलित किए जाने पर अपनी गहरी आपत्ति जताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस कृत्य को राजनीतिक हितों के लिए सरकारी तंत्र, प्रशासनिक मशीनरी और परंपराओं का खुला दुरुपयोग बताया है।प्रेस को जारी एक तीखे बयान में कांग्रेस प्रवक्ता प्रकाश शर्मा ने सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा, “देश के प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाना क्या अब कोई राष्ट्रीय या धार्मिक पर्व बन गया है? आखिर जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी संसाधनों को किसी व्यक्ति विशेष के जन्मदिन को चमकाने में क्यों फूंका जा रहा है? क्या यह जनता से जुड़े असल मुद्दों और बुनियादी समस्याओं से ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी साजिश नहीं है?”प्रकाश शर्मा ने जनहित के गंभीर मामलों को रेखांकित करते हुए कहा कि आज पूरा देश और हमारा जिला बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर निम्नलिखित मुद्दों को उठाते हुए सरकार को घेरा:कमरतोड़ महंगाई: आज रसोई गैस, खाद्य तेल, दालें और पेट्रोल-डीजल शक्कर प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं। आम गृहणियों का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है और गरीब तथा मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी दूभर हो गया है। क्या ऐसे समय में फिजूलखर्ची करके उत्सव मनाना आम जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा नहीं है?बढ़ती बेरोजगारी: जिले और देश का शिक्षित युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहा है। भर्तियां अटकी पड़ी हैं और रोजगार के नए अवसर समाप्त हो रहे हैं। युवा वर्ग मानसिक तनाव में जीने को मजबूर है, लेकिन सरकार उनकी सुध लेने के बजाय तमाशों में व्यस्त है।जर्जर स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था: सरकारी अस्पतालों में आज भी डॉक्टरों, जरूरी दवाइयों और आधुनिक उपकरणों की भारी कमी है, जिसके कारण गरीब जनता निजी अस्पतालों में लुटने को मजबूर है। सरकारी स्कूलों की हालत बदहाल है, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट पर केंद्रित है।किसानों की अनदेखी: अन्नदाता आज भी खाद, बीज और फसलों के उचित दाम के लिए परेशान है। कृषि लागत लगातार बढ़ रही है और कर्ज के बोझ तले किसान दबा जा रहा है।शर्मा ने तीखा प्रहार करते हुए आगे कहा कि जब जनता बिजली कटौती, खराब सड़कों और पीने के साफ पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है, तब लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर यह भव्य और आडंबरपूर्ण आयोजन क्यों? क्या जनता के टैक्स के पैसे की यह बर्बादी तुरंत बंद नहीं होनी चाहिए?उन्होंने महामहिम राज्यपाल और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस तरह के आयोजनों को तत्काल रोका जाए और सरकारी मशीनरी व जनता के पैसे का उपयोग केवल और केवल जनहित के कार्यों तथा बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने में किया जाए ?
