सिर्फ ‘नेम प्लेट धारी’ बन कर रह गए राजनांदगांव जिला कांग्रेस के पदाधिकारी? जनहित के मुद्दों पर जिम्मेदार साधे बैठे हैं मौन, जिला प्रवक्ता भी साबित हो रहे पूरी तरह निष्क्रिय?


(जसीम कुरैशी की रिपोर्ट)
छूरिया सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार जनता की समस्याओं से दूरी और संगठन की निष्क्रियता को लेकर उठने लगे गंभीर सवाल, प्रवक्ताओं की चुप्पी से कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष।राजनांदगांव।जिला कांग्रेस कमेटी राजनांदगांव में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। संगठन के भीतर और आम जनता के बीच अब यह चर्चा आम हो चली है कि जिला कांग्रेस के अधिकांश पदाधिकारी सिर्फ ‘नेम प्लेट धारी’ बनकर रह गए हैं। पदों की तख्ती लगाकर घूमने वाले इन जिम्मेदार नेताओं को न तो जनता की सुध है और न ही संगठन को मजबूत करने की चिंता। आलम यह है कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जनहित के दर्जनों गंभीर मुद्दे मुंह बांधे खड़े हैं, लेकिन जिला कांग्रेस के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने इस पर रहस्यमयी मौन धारण कर रखा है।पार्टी का पक्ष रखने में पूरी तरह फेल साबित हो रहे जिला प्रवक्ता इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली भूमिका जिला प्रवक्ताओं की रही है। जनता के मुद्दों को मुखरता से उठाने और मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने के लिए नियुक्त किए गए जिला प्रवक्ता पूरी तरह निष्क्रिय साबित हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर जन विरोधी फैसलों और जनता की समस्याओं पर इन प्रवक्ताओं द्वारा एक भी बयान जारी न करना या विरोध दर्ज न कराना इनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब मीडिया सेल और प्रवक्ता ही हर मुद्दे पर फेल और मौन रहेंगे, तो विपक्ष की भूमिका कैसे तय होगी?अस्तित्व की लड़ाई के बीच निष्क्रियता पर उठे सवाल राजनीतिक गलियारों और जागरूक नागरिकों के बीच यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि विपक्ष में होने के बावजूद आखिर कांग्रेस इतनी शांत क्यों है? सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन की मनमानी जैसे बुनियादी मुद्दों पर जहां कांग्रेस को जनता की आवाज बनना चाहिए था, वहां पार्टी के बड़े और जिम्मेदार पदाधिकारी नदारद नजर आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं का ही कहना है कि पदाधिकारी सिर्फ बड़े नेताओं के दौरों पर चमकने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट करने तक सीमित हो गए हैं। जमीन पर उतरकर संघर्ष करने का माद्दा अब जिला संगठन में दिखाई नहीं दे रहा।नेम प्लेट की होड़, पर जिम्मेदारी से मुंह मोड़ पार्टी सूत्रों और स्थानीय जानकारों की मानें तो जिला कार्यकारिणी और विभिन्न प्रकोष्ठों में पद पाने के लिए नेताओं में भारी होड़ मची रहती है। हर कोई अपने लेटर पैड और गाड़ी पर ‘पदाधिकारी’ लिखवाने को आतुर है। लेकिन जब बात इन पदों के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को निभाने की आती है, तो सब पीछे हट जाते हैं। जनता जब अपनी समस्याओं को लेकर विपक्ष की ओर देखती है, तो उसे सिर्फ खाली दफ्तर और मौन रहने वाले नेता ही नजर आते हैं।कार्यकर्ताओं में बढ़ रहा है भारी असंतोष जिला कांग्रेस के इस ठंडे रवैये से सबसे ज्यादा निराश धरातल पर काम करने वाला आम कार्यकर्ता है। कार्यकर्ताओं का दर्द है कि जब पदाधिकारी और प्रवक्ता ही जनता के मुद्दों पर आंदोलन या विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा नहीं बनाएंगे, तो वे किसके नेतृत्व में सड़कों पर उतरें? जनहित के मुद्दों पर लगातार साधे गए इस मौन के कारण जनता के बीच भी कांग्रेस की छवि कमजोर हो रही है, जिसका सीधा नुकसान आने वाले समय में संगठन को उठाना पड़ सकता है।अब देखना यह होगा कि इस चौतरफा उठते सवालों के बाद क्या राजनांदगांव जिला कांग्रेस के जिम्मेदार पदाधिकारी और निष्क्रिय जिला प्रवक्ता अपनी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या फिर ‘नेम प्लेट’ की आड़ में मौन रहने का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा ?

Author: Sudha Bag

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