जसीम कुरैशी की रिपोर्ट
छूरिया । ईद मिलाद-उन-नबी के पावन अवसर पर छूरिया नगर में आपसी भाईचारे सौहार्द की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। यहाँ मुस्लिम समुदाय द्वारा निकाले गए पारंपरिक जुलूस का स्वागत करने और अकीदतमंदों की सेवा के लिए बौद्ध समाज के भाइयों ने आगे बढ़कर कदम बढ़ाए, जिसकी पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।जगह-जगह लगाए गए स्टॉल जश्ने ईद मिलाद-उन-नबी त्योहार के मौके पर छूरिया के मुख्य मार्गों से होकर गुजर रहे मिलाद-उन-नबी के जुलूस में शामिल लोगों और आम राहगीरों के लिए बौद्ध समुदाय के नागरिकों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे। उमस और गर्मी को देखते हुए बौद्ध समाज के भाइयों ने जुलूस का गर्मजोशी से स्वागत किया और बड़े ही प्रेम भाव से सभी को ठंडा शरबत व पेयजल पिलाया।गले मिलकर दी मुबारकबाद इस दौरान दोनों ही समुदायों के बीच अद्भुत तालमेल और प्रेम देखने को मिला। शरबत वितरण के साथ-साथ बौद्ध और मुस्लिम भाइयों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद मिलाद-उन-नबी की मुबारकबाद दी। इस पहल ने नगर की पुरानी और अटूट गंगा-जमुनी तहजीब को एक बार फिर जीवंत कर दिया।इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म: स्थानीय नागरिक इस सराहनीय कार्य की क्षेत्र में चौतरफा तारीफ हो रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छूरिया हमेशा से ही आपसी प्रेम और शांति का प्रतीक रहा है। इस तरह के आयोजन यह संदेश देते हैं कि मजहब चाहे कोई भी हो, आपस में मिलजुलकर रहना और इंसानियत की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। बौद्ध भाइयों के इस सेवा भाव ने पूरे नगर का दिल जीत लिया है।इस आयोजन में प्रमुख रूप से शामिल भीम आर्मी ब्लाक अध्यक्ष मनोज कोचे ललित मेश्राम नुतन जमुरिया हेमलाल बाघमारे
बीर सिंह टेमरे शिवेंद्र टेमरे उमेश सहारे कमलेश्वर बसंत
शिव प्रसाद टेमरे गोविंद कोचे किशन कोचे रितेश व अन्य लोग रहें शामिल
