रायपुर/16 अगस्त 2026। शिक्षकों के पेंशन की गणना के लिये सेवा अवधि को लेकर जारी आदेश को शिक्षक विरोधी षड्यंत्र बताते हुए प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के द्वारा दिए गए पेंशन के अधिकार से वंचित करना चाहती है। पूर्ण पेंशन की पात्रता के लिए जो शर्ते हैं लगाई गई है, के वह अपने आप में भेदभावपूर्ण है। राज्य सरकार ने आदेश में यह लिखा है कि 2018 में संविलियन की तिथि को सेवा की शुरुआत माना जाएगा जिसके आधार पर 2018 से पहले नियुक्त लगभग सभी शिक्षक पूर्ण पेंशन की पात्रता से वंचित हो रहे हैं, 8 साल की सेवा अवधि शिक्षक के तौर पर काम करने की आधार माना गया था, यदि 2018 से पहले के विभाग में 8 वर्षों के सेवा के उपरांत ही उनका संविलयन किया गया है तो 2018 से पहले की सेवा को पेंशन के लिए सेवा की गढ़ना से अलग करना शिक्षकों के साथ अन्याय है, अत्याचार है, नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है।प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पहले ही अपने न्याय निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि संविलयन से पहले की सेवा को सेवा निवृत्ति के लाभ के संदर्भ में सेवाकाल की गढ़ना में शामिल किया जाएगा लेकिन भाजपा की सरकार ने हाल ही में जो फैसला लिया है वह उच्च न्यायालय बिलासपुर के पूर्व के न्यायनिर्णय के खिलाफ है। यह सरकार गुरुजनों के सेवानिवृत्ति के लाभ और अधिकारों को कुचलने का कुत्सित प्रयास कर रही है।प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत पूरा पेंशन की पात्रता के लिए 33 वर्ष की अर्हक सेवा पूरी करना अनिवार्य, संविलयन किए गए शिक्षकों के 2018 से पहले की सेवा को पृथक करने से अधिकांश शिक्षक पूर्ण मासिक पेंशन के लाभ से वंचित किए जा रहे हैं। भाजपा की सरकार ने पहले तो पुरानी पेंशन योजना को खत्म किया और अब लाखों शिक्षकों को पूर्ण पेंशन के लाभ से वंचित करना चाहती है। भाजपा सरकार का मूल चरित्र ही कर्मचारी विरोधी है, शिक्षा और शिक्षक विरोधी है।
