रायपुर/03 अगस्त 2026। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि लगातार बढ़ती बेलगाम महंगाई ने आम जनता की आर्थिक स्थिति को गंभीर संकट में डाल दिया है। रसोई से लेकर बच्चों की पढ़ाई, इलाज, बिजली, परिवहन और रोजमर्रा की हर जरूरत महंगी हो चुकी है, लेकिन सरकार केवल कागजों में महंगाई कम होने का दावा कर रही है। वास्तविकता यह है कि जनता की जेब खाली हो रही है और सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि 2014 में मोदी जी ने वादा किया था 100 दिनों के अंदर महँगाई कम करने का जनता ने विश्वास किया और सत्ता की चाबी मोदी जी के हाथों में दे दिया। 4453 दिन हो गया है, मोदी सरकार के ग़लत नीति के परिणाम के कारण उल्टा महँगाई ने विकराल रूप ले रखा है। जब 350 रुपया गैस सिलेंडर यूपीए सरकार में मिलता था तो महँगाई डायन कहकर भाजपा नेता प्रदर्शन करते थे, आज गैस सिलेंडर 1000 रुपया पार हो गया, खाद्य तेल प्रति किलो 200 रुपया, राहर दाल 150 रुपया प्रति किलो, शक्कर प्रति किलो 50 रुपये, दैनिक जीवन की हर एक आवश्यक वस्तुओं के दामों में बेतहाशा वृद्धि से किचन में संकट छा गया है। महिलाएँ चिंतित एवं परेशान हैं और ऊपर से विष्णुदेव साय सरकार में बिजली का झटका से और महँगाई बढ़ गया हैं। महतारी वंदन योजना में कुछ महिलाओं को एक हज़ार रुपया दिया जा रहा, एक हज़ार रुपया बदले में सरकार 10,000 रुपया जनता के जेब में डाका डाल रहें है।
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि आज हर वर्ग किसान, मजदूर, कर्मचारी, छोटे व्यापारी, युवा और मध्यम वर्ग महंगाई की मार झेल रहा है। परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है। आम आदमी की आय नहीं बढ़ी, लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा जारी किए जा रहे आर्थिक आंकड़ों पर जनता का भरोसा लगातार कम होता जा रहा है, क्योंकि लोगों का अनुभव सरकारी दावों से बिल्कुल उलट है। यदि महंगाई वास्तव में नियंत्रण में है तो बाजार में खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दालों, खाद्य तेल, दूध, गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार क्यों बढ़ रही हैं? आखिर आम नागरिक को हर महीने अपनी जरूरतों में कटौती क्यों करनी पड़ रही है? सरकार को बताना चाहिए कि उसकी आर्थिक नीतियों का लाभ आम जनता तक क्यों नहीं पहुंच रहा है।
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा है कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण करने के बजाय केवल प्रचार और आंकड़ों की बाजीगरी में लगी हुई है। जनता को राहत देने के बजाय सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है। जनता अब सरकारी दावों के बजाय अपने खाली होते बैंक खाते और बढ़ते घरेलू खर्च पर भरोसा कर रही है।
