रानी दुर्गावती एक वीर योद्धा ही नहीं,कुशल प्रशासक भी थे : जनपद अध्यक्ष संजय सिन्हा


(ख़बर छत्तीसगढ़ जसीम कूरैशी)
छुरिया “ विकासखंड के वनांचल ग्राम खोराटोला में आदिवासी ध्रुव गोंडवंशी समाज द्वारा परिक्षेत्र स्तरीय रानी दुर्गावती बलिदान दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संजय कुमार सिन्हा अध्यक्ष जनपद पंचायत छुरिया,अध्यक्षता शेरसिंह परतेती तहसील अध्यक्ष छुरिया,श्रीमती बिरम मांडवी जिला पंचायत सदस्य,बालमुकुंद कुंजाम सभापति जनपद पंचायत छुरिया, नैनसिंह पटेल,कुमारसाय साहू उपाध्यक्ष भाजपा मंडल गैंदाटोला, टी आर पंडरे रहे । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिन्हा ने बताया कि रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं। रानी दुर्गावती भारतीय इतिहास की उन महान वीरांगनाओं में से एक हैं, जिन्होंने अपने साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर के राजपरिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें घुड़सवारी, धनुर्विद्या, तलवारबाज़ी और युद्धकला का प्रशिक्षण मिला। उनका विवाह दलपत शाह से हुआ। पति के निधन के बाद उन्होंने अपने पुत्र वीर नारायण के संरक्षक के रूप में गोंडवाना राज्य का शासन संभाला।
बीरम मांडवी ने कहा कि रानी दुर्गावती एक न्यायप्रिय, दूरदर्शी और प्रजावत्सल शासिका थीं। उन्होंने अपने राज्य में कृषि, सिंचाई और जनकल्याण के अनेक कार्य कराए। उनकी प्रजा उनसे अत्यंत प्रेम करती थी। वे केवल एक वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल प्रशासक भी थीं।
परतेती में कहा की सन् 1564 में अकबर के सेनापति आसफ ख़ाँ ने गोंडवाना पर आक्रमण किया। शत्रु सेना संख्या और संसाधनों में कहीं अधिक शक्तिशाली थी, फिर भी रानी दुर्गावती ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने सैनिकों का नेतृत्व स्वयं किया और वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा।
पंडरे सर ने कहा कि जब उन्हें लगा कि अब शत्रु के हाथों बंदी बनने की स्थिति आ सकती है, तब उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय अपने प्राणों का बलिदान देना उचित समझा। 24 जून 1564 को उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका यह त्याग भारतीय इतिहास में साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम का अमर प्रतीक बन गया।
रानी दुर्गावती का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी साहस, आत्मसम्मान और कर्तव्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। उनका बलिदान केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए वे आत्मविश्वास, नेतृत्व और शक्ति की अद्भुत मिशन थी । इस कार्यक्रम में आसपास के सामाजिक बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।

Author: Sudha Bag

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