जसीम कुरैशी की रिपोर्ट
छूरिया राजनांदगांव। महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण पहल के तहत संतोष पांडेय के विशेष प्रयासों से राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र की पांच महिलाओं को देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित सांसद भवन में आयोजित लोकसभा सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक विधेयक की कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखने और उसकी साक्षी बनने का अवसर प्राप्त हुआ।
यह क्षण न केवल राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया है। संसद भवन में पहुंचकर इन महिला जनप्रतिनिधियों ने देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े इस ऐतिहासिक निर्णय के महत्व को आत्मसात किया।
इस अवसर पर जिला पंचायत राजनांदगांव की अध्यक्ष श्रीमती किरण रविन्द्र वैष्णव, जिला पंचायत मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह, नगर पंचायत डोंगरगांव की अध्यक्ष श्रीमती अंजू त्रिपाठी, पूर्व जनपद अध्यक्ष कवर्धा श्रीमती इंद्राणी चंद्रवंशी एवं जनपद अध्यक्ष खैरागढ़ राजेश्री त्रिपाठी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहीं। सभी ने लोकसभा की कार्यवाही में सहभागिता कर लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण अध्याय को करीब से देखा।
उल्लेखनीय है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जिसके माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस विधेयक की कार्यवाही के साक्षी बनकर इन महिलाओं ने स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया और इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।
इस दौरान उपस्थित महिला जनप्रतिनिधियों ने सांसद श्री संतोष पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से क्षेत्र की महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ने और उसे समझने का सुनहरा अवसर मिला है। यह पहल निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी की महिलाओं को राजनीति एवं समाज सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
महिलाओं ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक मील का पत्थर साबित होगा।
अंत में सभी जनप्रतिनिधियों ने यह विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के अवसरों से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा, उनकी भागीदारी लोकतंत्र में और अधिक सशक्त होगी तथा समाज में समानता, अधिकार और नेतृत्व की नई दिशा स्थापित होगी।
