चर्चित चेहरों की अनदेखी या अंदरूनी राजनीति? जिला कार्यकारिणी गठन पर उठे सवाल


जसीम कुरैशी की रिपोर्ट
छूरिया राजनांदगांव। जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन यादव के “निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में जगह नहीं” वाले बयान ने अब जिले की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। कार्यकारिणी गठन के बाद सामने आई सूची ने संगठन के भीतर ही असंतोष की चिंगारी को हवा दे दी है।
सबसे बड़ा सवाल उन नामों को लेकर उठ रहा है, जो वर्षों से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय, आक्रामक और चर्चित चेहरे रहे हैं, लेकिन उन्हें जिला कार्यकारिणी में जगह नहीं मिली। इनमें विरेंद बोरकर, नरेश शुक्ला, क्रांति भंडारी, लादूराम तुमरेकी, रामछत्री चंद्रवंशी, प्रकाश शर्मा, लक्ष्मी सांखला, विभा साहू, अंगेसर दाऊ, गोवर्धन देशमुख और चुम्मन साहू जैसे नाम प्रमुख हैं।
ये वही चेहरे हैं जो हर आंदोलन, हर धरना-प्रदर्शन और हर राजनीतिक मुद्दे पर भाजपा सरकार को खुलकर घेरते नजर आए हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक कांग्रेस की आवाज बुलंद करने वाले इन नेताओं को अचानक संगठन से बाहर रखना कई सवाल खड़े कर रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है —
क्या ये सभी नेता “निष्क्रिय” हो गए हैं? या फिर सक्रियता की परिभाषा ही बदल दी गई है?
सूत्रों की मानें तो कार्यकारिणी गठन में सिर्फ सक्रियता ही नहीं, बल्कि गुटीय समीकरण, नजदीकियां और अंदरूनी राजनीति भी निर्णायक भूमिका में रही। यही कारण है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कई कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर संगठन में मेहनत करने वालों की जगह “चयनित चेहरों” को प्राथमिकता दी जाएगी, तो इसका सीधा असर पार्टी की जमीनी मजबूती पर पड़ेगा। खासकर तब, जब 2028 के चुनाव को लेकर संगठन मजबूत करने की बात खुद मंच से कही जा रही हो।
जिला अध्यक्ष के बयान के बाद अब कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज है कि
“निष्क्रिय कौन और सक्रिय कौन — इसका फैसला आखिर किस आधार पर हुआ?”
फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा तूल पकड़ रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस संगठन के भीतर ही बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल सकता है।

Author: Sudha Bag

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