पुस्तकीय नहीं, कौशल आधारित शिक्षा की जरूरत: डॉ. वर्णिका शर्मा

रायपुर(Raipur)19.12.25 :स्थित आदर्श महाविद्यालय में “आईकेएस (भारतीय ज्ञान परंपरा) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का समन्वय: समग्र एवं परिवर्तनकारी उच्च शिक्षा की दिशा में एक मार्ग” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में बाल आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं।अपने प्रेरक उद्बोधन में डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि “आप जितना ज्ञान में डूबेंगे, उतना ही समाज में निखरेंगे।” उन्होंने अध्ययन और अध्यात्म के संयोग से बनने वाले व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर कौशल, संवेदनशीलता और व्यवहार से जोड़ने का आह्वान किया।

एआई और टेक्नोलॉजी के वर्तमान युग में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर विवेकानंद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विद्या, अध्यात्म और भावनाएँ केवल नौकरी नहीं, बल्कि सशक्त व्यक्तित्व निर्माण का आधार हैं।डॉ. शर्मा ने आयोग द्वारा हाल ही में संचालित “रक्षक पाठ्यक्रम” का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल तकनीकी रूप से नहीं, बल्कि भावनात्मक और नैतिक रूप से भी सशक्त बनाना है, ताकि वे मूल्यों के साथ आगे बढ़ें और misguided मिसाइल बनने से बचें। अंत में उन्होंने “राष्ट्र पुनः निर्माण करे” की पंक्तियों के साथ सभी को शुभकामनाएँ दीं।कार्यक्रम में आदर्श महाविद्यालय के डायरेक्टर डॉ. विजय सक्सेना, प्राचार्य डॉ. बरनाली रॉय, डॉ. दिव्या शर्मा, रविशंकर विश्वविद्यालय के डीन डॉ. राजीव चौधरी, उप-प्राचार्य कोलंबिया कॉलेज डॉ. आभा दुबे सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सभी अतिथियों द्वारा महाविद्यालय की पुस्तक का विमोचनकिया गया, जिसके साथ ही दो दिवसीय सेमिनार का औपचारिक आगाज़ हुआ।सेमिनार के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय से आए प्रोफेसर्स विभिन्न तकनीकी सत्रों में व्याख्यान देंगे। प्रत्येक सत्र के पश्चात पेपर प्रेजेंटेशन भी होंगे। मंच संचालन डॉ. रोली तिवारी एवं भावना क्षत्रिय ने किया। कार्यक्रम में नर्सिंग कॉलेज के सभी विद्यार्थी एवं शिक्षकगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Author: Sudha Bag

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