!! देव दुर्लभ भागवत कथा मात्र मनुष्यों को प्राप्त है !!श्री मज्जगदगुरु रामानुजाचार्य श्री स्वामी घनश्यामाचार्य‌‌‌ जी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन

तिल्दा नेवरा !! देव दुर्लभ भागवत कथा मात्र मनुष्यों को प्राप्त है !!
श्री मज्जगदगुरु रामानुजाचार्य श्री स्वामी घनश्यामाचार्य‌‌‌ जी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का तृतीय दिवस
कथा व्यास श्री कृष्णेन्द्र जी महाराज

जिनके ऊपर भगवान की असीम कृपा होती है, वही व्यक्ति श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने का परम सौभाग्य प्राप्त करता है। श्रीमद्भागवत कथा का सुनना तो स्वयं देवराज इंद्र को भी नसीब नहीं हुआ था — इतनी दुर्लभ और पवित्र है यह कथा। जो व्यक्ति श्रद्धा, प्रेम और भक्ति भाव से कथा श्रवण करता है, उसके जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं ।

भक्ति ऐसी होनी चाहिए जैसी मीराबाई की थी — अडिग, निष्कपट और पूर्ण समर्पण से भरी हुई। मीराबाई ने अपने जीवन में भक्ति का वह आदर्श स्थापित किया, जो आज भी हर भक्त के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने संसार की किसी भी बात की परवाह नहीं की, क्योंकि उनके लिए तो केवल एक ही सत्य था — श्रीकृष्ण प्रेम। जब संपूर्ण जगत उन्हें रोकने लगा, जब परिवार और समाज ने उनके मार्ग में बाधाएँ डालीं, तब भी मीराबाई का विश्वास कभी नहीं डगमगाया।

भगवान हर पल हमारे साथ हैं — वे हमारे दुःख-सुख के साक्षी हैं। जब हम किसी कठिनाई में होते हैं, तब भी भगवान हमारी चिंता करते हैं, हमारे जीवन को सही दिशा देने का प्रयास करते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि इस जगत में जो कुछ भी है, वह सब मैंने बनाया है। पर्वत, नदियाँ, वृक्ष, पशु, पक्षी, सब मेरे ही अंश हैं। लेकिन इन सबमें मुझे सबसे अधिक प्रिय मानव है, क्योंकि उसी में भक्ति करने की शक्ति है, प्रेम करने की क्षमता है, और आत्मज्ञान प्राप्त करने की बुद्धि है।

मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण उसका अभिमान है। जब व्यक्ति अपने ज्ञान, धन, पद या रूप का घमंड करता है, तो वही अभिमान उसे धीरे-धीरे पतन की ओर ले जाता है। इतिहास साक्षी है कि जिन्होंने अभिमान किया, वे भगवान की कृपा से वंचित रह गए।

जिस घर में सुयोग्य और संस्कारवान संतान होती है, वह घर वास्तव में स्वर्ग के समान होता है। ऐसी संतान माता-पिता के पुण्य का फल होती है। केवल विद्या प्राप्त करना पर्याप्त नहीं, बल्कि जीवन में संस्कारों का होना आवश्यक है, क्योंकि संस्कार ही वह आधार हैं जिन पर समाज और धर्म की नींव टिकी है।
कथा क्रम में कल भगवान श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव मनाया जाएगा
1 दिसम्बर को विभिन्न तीर्थों से संत महापुरुषों का दर्शन लाभ प्राप्त होगा
और 2 दिसम्बर को श्री गोदा रंगनाथ कल्याण विवाह महोत्सव मनाया जाएगा
श्रीमद्भभागवत कथा का भव्य आयोजन

दिनांक: 25 से 01 दिसम्बर

समय: दोपहर 2:30 बजे से शाम 6 बजे तक

स्थान – श्री बालाजी मंदिर श्री गोकर्ण भक्ति धाम आश्रम तुलसी तिल्दा रायपुर छ० ग०

Author: Sudha Bag

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