अमानक दवाओं पर सरकार गंभीर नहीं, दवा के नाम पर मिल रहा है ज़हर, केवल एडवाइजरी जारी करके सोई हुई है सरकार

रायपुर(Raipur)15 अक्टूबर 2025: पूरे प्रदेश में अमानक दवाओं को लेकर सरकार के मौन पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि दवा के नाम पर ज़हर बेचे जा रहे हैं, नकली अमानक, गुणवत्ताहीन, फंगस लगे दवा का वितरण मरीजों को किया जा रहा है, इतने गंभीर विषय पर यह सरकार गंभीर नहीं है, अब तक न किसी की जिम्मेदारी तय की गई, न ही कोई कार्यवाही हुई। छोटे-छोटे बच्चों को जो कृमि की जो दवाइयां खिलाई गई हैं, जांच में अमानक पाया गया, डायरिया पीड़ित मरीजों को दी गई दवाओं में फंगस मिला, कई एंटीबायोटिक दवाओं से मरीजों को एलर्जी हो रही है, गर्भवती महिलाओं और माताओं को बांटी गई आयरन, सल्फेट और फोलिक एसिड की दवाएं गुणवत्ताहीन पाई गई।

सरकारी अस्पतालों में फफूंद लगे ग्लूकोस बोतल चढ़ाने से मरीजों की तबियत खराब हो रही है। पेरासिटामोल से लेकर सर्जिकल ब्लेड तक, एल्बेंडाजोल से लेकर प्रेग्नेंसी कीट तक अमानक निकले। यह सरकार उन दवाओं के उपयोग को लेकर मात्र एडवाइजरी जारी करके अपने जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहती है।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि केवल अस्थायी रोक लगाने और एडवाइजरी जारी करने से व्यवस्था नहीं सुधर सकती, अमानक दवाओं के खरीदी की तत्काल जांच और ठोस कार्रवाई आवश्यक है। आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीदी की प्रक्रिया पारदर्शी हो, उच्च स्तर पर जिम्मेदारी तय किया जाए, जनता के जान को जोखिम में डालने का अधिकार किसी को नहीं है।

भाजपा सरकार का फोकस केवल कमीशन की काली कमाई में है, इसके लिए आम जनता के स्वास्थ्य को दांव पर लगा दिया गया है। भाजपा के पूर्ववर्ती सरकार में भी इसी तरह की स्थिति थी, गर्भाशय कांड, अखफोड़वा कांड, नसबंदी कांड, स्पाइन ऑपरेशन कांड, किडनी फेल जैसे गंभीर प्रकरण गुणवत्ताहीन दवाओं के कारण ही हुए, मोटा कमीशन लेकर ब्लैक लिस्टेड कंपनियों से दवाएं खरीदी गई थीं, अब एक बार फिर से वही दौर आ गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज कहा है कि जिन दवा कंपनियों के उत्पादों पर देश के विभिन्न राज्यों में प्रतिबंध लगा है, उन्हीं कंपनियों की लगभग वही दवाइयां प्रदेश में धड़ल्ले से बिक रही है। सरकार बताए कि डॉक्टरों की शिकायत के बाद भी सप्लायर कंपनियों पर कोई कार्यवाही अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई? आखिर गुणवत्ताहीन दवाओं के सप्लायरों को किसका संरक्षण है? कब तक मरीजों के जान से खिलवाड़ होता रहेगा?

Author: Sudha Bag

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