छूरिया अंचल के दो गांवों में आदिवासी भवन निर्माण कछुआ गति से ग्रामीण बोले ठेकेदार के बजाय कर्मचारी ही कर रहे संचालन?
&जसीम कूरैशी कि रिपोर्ट&
छुरिया जनपद पंचायत में मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों पर ठेकेदार की आड़ में भवन निर्माण कार्य करवाने का गंभीर आरोप लगा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार छूरिया ब्लॉक अंचल के अंतर्गत आने वाले दो अलग-अलग गांवों में आदिवासी भवन निर्माण का कार्य सालों से अधूरा पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन भवनों के निर्माण में न तो ठेकेदार खुले तौर पर दिख रहे हैं, न ही कार्यस्थल पर अनिवार्य रूप से लगाए जाने वाले सूचना पटल मौजूद हैं। दोनों ही जगहों पर सूचना पटल खाली पड़े हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं होता कि निर्माण कार्य किस एजेंसी या ठेकेदार को सौंपा गया है।
कर्मचारियों की सीधी भागीदारी का आरोप?
ग्रामीणों का आरोप है कि भवन निर्माण सामग्री की खरीदी से लेकर कामकाज की निगरानी तक में जनपद पंचायत छुरिया के संविदा कर्मचारी और अन्य कर्मचारी सीधे तौर पर शामिल हैं। यहां और पारदर्शिता के नियमों के खिलाफ है, क्योंकि किसी भी निर्माण कार्य में ठेकेदार की नियुक्ति और उसकी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य है।
काम की रफ्तार बेहद धीमी
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्य शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन भवन आज भी अधूरे खड़े हैं। निर्माण की गति इतनी धीमी है कि इसे कछुआ चाल कहना गलत नहीं होगा। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कार्य में देरी और पारदर्शिता की कमी से परियोजना की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
अधिकारियों के संज्ञान में मामला
जानकारी के अनुसार यह मामला अब अधिकारियों के संज्ञान में आ चुका है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही निर्माण कार्य, सामग्री खरीदी और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका को लेकर जांच शुरू होगी। हालांकि, फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
गांव के लोगों से बात करने पर कहां सुचना पटल पर जानकारी पुरा होना चाहिए कि निर्माण स्थल पर नियमों के अनुसार सूचना पटल पर तुरंत जानकारी लिखवाएं जाए, अधूरे भवनों का कार्य समय सीमा में पूरा किया जाए और यदि कर्मचारियों की संलिप्तता साबित हो, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
