ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच, छत्तीसगढ़9 जुलाई 2025 की राष्ट्रव्यापी हड़ताल

सन् 1886 में शिकागो शहर में 8 घण्टे काम की मांग को लेकर मजदूरों का आन्दोलन हुआ था जिसमें मजदूरों पर पुलिस द्वारा दमन किया गया परिणाम स्वरुप कई मजदूर शहीद हो गये। तभी से हम उन शहीदो की याद में 1 मई को मई दिवस याने अन्र्तराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाते आ रहे है। परिणाम स्वरुप काम के घण्टे आठ किये गये। इसी तरह हमारे पूर्वजों द्वारा संघर्ष,कुर्बानी के बाद अंग्रेजी राज से लेकर आज तक हम 44 श्रम कानून हासिल किये थे। आज की भाजपा की केंद्र सरकार इसे ही पलटने पर अमादा है. भाजपा की केन्द्र सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान जब देश की जनता जिन्दगी और मौत की लड़ाई लड़ रही थी, मजदूरों के 44 श्रम कानूनों में से 29 प्रभावशाली कानूनों को खत्म कर चार नए लेबर कोड (श्रम संहिता) बनाए। इन चार नए श्रम संहिताओं के लागू होने पर मजदूरों ने अपने संघर्षों और बलिदानों से जो श्रम कानून हासिल किये थे, भाजपा सरकार ने उसे खत्म कर दिया। सरकार ने यूनियन बनाना, पंजीकरण करवाना लगभग असंभव कर दिया और अगर यूनियन बन भी गई तो सरकार उसे कभी भी खत्म कर सकती है। धरना, प्रदर्शन और हड़ताल करने पर भारतीय न्याय संहिता (IPC) की धारा 111 के तहत जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। स्थाई रोजगार की जगह, बीजेपी सरकार निश्चित अवधि, प्रशिक्षु, आउटसोर्स, और हर काम का ठेकाकरण नया फरमान ले आई है। स्थाई नौकरी ना होने पर मजदूर अपने अधिकार के लिए लामबंद नहीं हो सकेंगे और ग्रेच्युटी व अन्य लाभों से वंचित हो जाएँगे। बिना नोटिस के मजदूरों को नौकरी से निकाला जा सकता है। कारखाने में 40 से कम मजदूर होने पर न्यूनतम वेतन, ई.पी.एफ, व अन्य श्रम कानून लागू नही होंगे। महिलाओं को कारखानों में रात की पाली में भी काम में लगने की अनुमति होगी, जो पहले नहीं था। कारखानों में मजदूरों के लिए काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिए गए। भाजपा के मित्र उद्योगपति तो दिन में 15 घंटे काम की न केव वकालत कर रहे हैं बल्कि उसे औचित्यपूर्ण बताकर ऐसा प्रावधान की मांग उठा रहे हैं, याने मजदूर अपनी पूरी देह गलाकर केवल उनके लिए मुनाफे पैदा करे यह उनकी सोच है । ई.पी.एफ. का अंशदान पहले 12% था, अब घटाकर 10% कर दिया जा रहा इससे मजदूरों को मासिक 4% का नुकसान होगा। भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा लगातार मनेरगा बजट में कटौती की जा रही है। जिसके कारण मजदूरों को 100 दिन का काम नहीं मिल रहा। मनरेगा में रोजगार ना मिलने से कल्याण बोर्ड में पंजीकृत मजदूरों का नवीनीकरण नहीं हो रहा और उन्हें शादी, मृत्यु पर आर्थिक लाभ आदि के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। भाजपा की सरकार आँगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा वर्कर के बजट में लगातार कटौती कर रही है। इन कार्मिकों को समय पर मानदेय नहीं मिल रहा और सरकार निजीकरण करने की ओर बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला होने पर भी आँगनबाड़ी कार्यकत्री/सेविकाओं को सेवानिवृत्त होने पर ग्रेच्युटी नहीं दे रही है। केन्द्र की भाजपा सरकार बिजली बोर्ड, बीमा, बैंक, बंदरगाहों, राष्ट्रीय राज्य मार्गों आयुध निर्माणियों, एफआरआई, रेलवे आदि का निजीकरण कर रही है और अपने चहेते उद्योगपतियों अडानी, अंबानी, टाटा, बिडला और कुछ अन्य उद्योगपतियों को देश की संपदा कौड़ियों के भाव बेच रही है। स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य सरकार ने प्राइवेट कंपनी को दे रखा है। स्मार्ट मीटर के रुप में 10000 रुपए के करीब बिजली उपभोक्ता से वसूले जाएँगे। केन्द्र सरकार ने नए मोटर व्हीकल एक्ट में प्रावधान किया है कि यदि ड्राइवर एक्सीडेंट करता है और मौके से भाग जाता है तो उसे 10 वर्षों की जेल और 10 लाख रुपए जुर्माना भरना होगा। भाजपा की केन्द्र सरकार ने मजदूरों व अन्य तबकों के खिलाफ जो नए कानून बनाए हैं, इनके लागू होने पर देश का मजदूर, कर्मचारी पूरी तरह मालिकों का गुलाम बना दिया जाएगा । श्रमिकों की जायज मांग पर की जाने वाली हड़ताल को भी वह कभी भी गैरकानूनी घोषित करने का प्रावधान कर रही है । उसने भारतीय न्याय संहिता ( बी एन एस ) की धारा 111 जोड़कर ट्रेड यूनियनों के किसी भी संगठति विरोध को संगठित अपराध की श्रेणी शामिल कर दिया है। सरकार अंधाधुंध तरीके से एक ओर मजदूरों को गुलाम बनाए का रास्ता सुगम कर रही है और दूसरी ओर देश के सार्वजनिक सम्पत्ति विनिवेशीकरण, निजीकरण के जरिए बड़े निजी पूंजीपतियों के हाथों सौंप रही है और श्रमिक वर्ग जब इन नीतियों का विरोध कर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ, पेंशन के बुनियादी अधिकार न्यूनतम वेतन, समान काम समान वेतन की मांग पर आवाज उठाता है तो उन्हें कभी देशद्रोही करार देकर व नफरती साम्रदायिक विभाजन के नारों की आड़ में षड्यंत्र कर उसकी एकता को ही खंडित करने का कुचक्र चला देती है। इसलिए भारत सरकार द्वारा बनाए गए चार लेबर कोड को रद्द करने की मांग के साथ देश के हर हिस्से के कामकाजी मजदूर, कर्मचारी याने श्रमजीवी वर्ग ने इसका तीव्र विरोध करने के साथ-साथ विभाजनकारी राजनीति का विरोध करने के लिए कमर कसकर इन नीतियों को वापस लेने की मांग को लेकर 9 जुलाई को एक दिन की देशव्यापी हड़ताल का फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ के श्रमिक वर्ग और मेहनती आवाम, कर्मचारी साथी, आम नागरिक बंधुओं से इसलिए हम इस हड़ताल को प्रदेश में अभूतपूर्व रूप से सफल बनाने की अपील करते हैं। हम आपसे अपील करते हैं कि व्यापक अभियान, कन्वेशन के जरिए हड़ताल का संदेश हर मजदूर तक पहुंचाए, 8 जुलाई को प्रदेश भर में मशाल जुलूस/ केंडल मार्च/ मोटर साइकल रैली आयोजित करें और 9 जुलाई की आम हड़ताल ने शामिल हों।

Author: Sudha Bag

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