कार्य एजेन्सी को बचाने के लिये सचिव को बनाया बलि का बकरा,

👉ग्राम सड़क चिरचारी में सूचना पटल के गिरने से बच्चे की हुयी थी मौत
👉तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के पहले ही जारी हो गया निलंबन का आदेश ?
जसीम कुरैशी की रिपोर्ट
छुरिया- ग्राम सड़क चिरचारी में युवांश निषाद पिता नरेन्द्र निषाद उम्र 5 साल की सूचना पटल के नीचे दब कर मर जाने की खबर सबने देखी और सुनी इसके लिये धरना प्रदर्शन भी हुआ बच्चे के माता पिता को इंसाफ दिलाने सब कार्यवाही हुई लेकिन अंत में मृत युवांश के परिवार को कोई इंसाफ नहीं मिला और इस घोर लापरवाही में जिसके उपर कार्यवाही होना था उसे पूरी तरह से बचा लिया गया और बलि का बकरा बना ग्राम सड़क चिरचारी का सचिव।
मिली जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर राजनांदगांव ने दिनांक 22.06.2025 को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने कहा था। इस जांच समिति में संयुक्त कलेक्टर सरस्वती बंजारे, लोकनिर्माण विभाग के ई ई एस के चौरसिया और उपसंचालक पंचायत देवेन्द्र कौशिक को यह जिम्मेदारी दी गई थी। अब प्रश्न यह उठता है कि सूचना पटल गिरने से बच्चे की मौत की घटना दिनांक 22.06.2025 की है। जांच समिति जांच के लिये 25.06.2025 को ग्राम सड़क चिरचारी आई और घटना स्थल का निरीक्षण किया। जबकि सचिव को निलंबित करने का आदेश जिला पंचायत राजनांदगांव से जारी हुआ है वह आदेश दिनांक 23.06.2025 का है। इसमें सबसे बड़ी कमजोरी यह दिख रही है कि जब 3 सदस्यीय जांच समिति 25.06.2025 को ग्राम सड़क चिरचारी आई और घटना स्थल का निरीक्षण किया तो सचिव के निलंबन का आदेश 3 सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट देने के पहले ही बना दिया गया था। जब सचिव का निलंबन आदेश दिनांक 23.06.2025 को जारी हो गया था तो फिर दिनांक 3.07.2025 को सोशल मीडिया में वायरल हुआ इसमें यह बात सबके समझ से परे है कि आखिर 10 दिन तक निलंबन आदेश को रोक कर रखने की क्या मंशा थी जब आदेश 23.06.02025 को जारी हो गया था तो उसे तत्काल प्रभाव से सचिव को दे देना था लेकिन एैसा नहीं किया। यह निलंबन आदेश आज दिनांक 4.07.2025 तक सचिव के पास नहीं पहुंचा है और न ही इसकी जानकारी सचिव को है जैसा कि सचिव से मोबाईल पर बात करने पर सचिव ने जानकारी दी।
इस पूरे घटना क्रम को देखते हुये सूचना पटल के गिरने, बच्चे की बेसमय मौत होने और मां बाप को न्याय मिलने की बात तो दूर रही इसमें कार्य एजेंसी पर कार्यवाही होना चाहिये था क्योंकि इस निर्माण कार्य को करने वाला पूर्व सरपंच एवं कार्य एजेंसी है न कि सचिव सचिव का कार्य देखभाल हो सकता है निर्माण की गुणवत्ता जांचने का काम इंजीनियर और कार्य एजेंसी का है। जबकि जिला पंचायत सीईओ ने पूर्व सरपंच इंजीनियर एवं सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था उस विषय में कोई भी रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ग्राम के सचिव को बलि का बकरा बनाने में एैस लग रहा है कि पूर्व सरपंच एवं कार्य एजेंसी सत्ता सरकार से जुड़े हुये है और उन्हें किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाये बिना पूरी तरह से बचा लिया गया है और पूरे मामले को रफा दफा करने के लिये सिर्फ सचिव के उपर निलंबन करने की कार्यवाही कर दी गई है। जबकि वर्तमान सरपंच ने इस पूरे निर्माण कार्य से अपना पल्ला झा़ड लिया था कि इसमें उसका कोई लेना देना नहीं है।
क्या साय के सुशासन में इस तरह का अन्याय होना वाजिब है या इस पूरे प्रकरण की पुनः गहराई से जांच होनी चाहिये। और मृत बच्चे के परिवार को सही न्याय मिल सके यदि पीड़ित निषाद परिवार को सही न्याय नहीं मिलेगा तो वह परिवार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से भी अपनी गुहार लगायेंगे।
वर्जन
छन्नी साहू पूर्व विधायक खुज्जी
भाजपा नेता को बचाने के लिए एक छोटे से कर्मचारी सचिव के ऊपर कारवाई कर सचिव को बली के बकरा बनाया गया है जबकि कार्य एजेंसी सरपंच के ऊपर कार्रवाई होना चाहिए था। आगे भी जब भी कोई सरपंच भ्रष्टाचार करें तो सरपंच के ऊपर कारवाई न कर सचिव के ऊपर ही कार्रवाई होना चाहिए इस घटना से ऐसा प्रतीत होता है। जो भी कार्यवाही हुआ है गलत हुआ है।

Author: Sudha Bag

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