छत्तीसगढ़ प्रदेश में विभिन्न विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मी, अनियमित कर्मचारी,श्रम आयुक्त दर कर्मचारी जो किसी न किसी के प्रलोभन,झुठी आश्वासन और अवैध वसूली है परेशान होकर हाशिए पर धकेल दिया गया था। है लोगों कि आवाज बनकर अन्याय के खिलाफ अपने पद प्रतिष्ठा को खुंटी में टांगकर जो लोगों को एक साथ आने , अपनी आवाज उठानै , अपने अधिकारों की रक्षा करने और छत्तीसगढ सरकार कै महत्वपूर्ण योजनाओं को उच्चाधिकारियों से सतत संपर्क कर जाना समझा और लोगों को उनके मौलिक अधिकारों दिलाना महत्वपूर्ण है। श्रम आयुक्त दर वन कर्मचारी संघ के प्रांत प्रमुख हारुन मानिकपुरी बताया कि प्रदेश के विभिन्न संगठनों में जुड़े हुए संविदा कर्मियों, अनियमित कर्मचारी, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, श्रम आयुक्त दर वन कर्मचारियों को मुश्किल समय में किसी भी तरह से कोई राहत नहीं मिल रहा था। ऐसे में पीड़ित कर्मचारी मुझसे सहयोग मांगते किन्तु दूरदराज तक जाकर उनकी समस्या सुलझाना बिना राशि के संभव नहीं था क्योंकि वह स्वयं एक अल्प वेतन पर काम करने वाले हैं। ऐसे में संबंधित पीड़ित कर्मचारीयों से परिवहन शुल्क लेकर गांव – गांव,शहर शहर जाकर लोगों कि मदद की अधिकारी कर्मचारी,ढ जनप्रतिनिधियों से संपर्क
साधा और लोगों को उनके मौलिक अधिकार दिलाया जिससे लोगों में विश्वास बढ़ा। आज श्रम आयुक्त दर वन कर्मचारी संघ के बैनर तले एक वर्ष पूरा हो रहा है। जिसमें हजारों लोगों ने मुश्किल समय में अन्य संगठनों से जुड़े रहकर भी एक साथ काम करते रहे। और अन्य संगठनों को त्यागकर बिना ऊंच-नीच,भैदभाव के काम करने तैयार है।
जसीम कूरैशी कि रिपोर्ट छूरिया
