वीरांगना रानी दुर्गावती की वीरता-शौर्य और पराक्रम भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा:-किरण रविन्द्र वैष्णव

&जसीम कूरैशी कि रिपोर्ट&छुरिया:- आदिवासी धुर्वे गोड़ समाज शिकारीमाहका द्वारा आयोजित वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस कार्यक्रम में जिला पंचायत राजनांदगांव अध्यक्ष श्रीमती किरण रविन्द्र मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता चंन्द्रशेखर मंडलोई (अध्यक्ष मुडादार परिक्षेत्र)ने की कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जनपद पंचायत छुरिया अध्यक्ष संजय सिन्हा शामिल हुए। सर्वप्रथम रानी दुर्गावती जी के चैल चित्र पर माल्यार्पण पूजा अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। साथ ही सभी अतिथियों का फूल माला से स्वागत किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण रविन्द्र वैष्णव ने संबोधित करते हुए कहा कि रानी दुर्गावती अपने नाम के अनुरूप मां दुर्गा के समान वीर और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं। आज उनका बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती का जन्म लगभग 500 वर्ष पहले हुआ था। अमेरिका सहित पश्चिम के देशों को सामान्य तौर पर संस्कृति में अग्रणी माना जाता है, लेकिन भारत का गौरवशाली अतीत रहा है। आदिवासी अंचल की रानी दुर्गावती और रानी अवंतीबाई नारी सशक्तिकरण की सबसे बड़ी उदाहरण हैं। रानी दुर्गावती के पिता ने 500 साल पूर्व उन्हें घुड़सवारी, तलवारबाजी और युद्ध कौशल में निपुण बनाया था।रानी दुर्गावती इतनी पराक्रमी थीं कि उन्होंने मुगल सम्राट अकबर के सामने झुकने से इनकार कर दिया। राज्य की स्वतंत्रता और अस्मिता की रक्षा के लिए उन्होंने युद्ध का मार्ग चुना और कई बार शत्रुओं को पराजित किया।संकुन कुदन बदोले सरपंच, मीना कुंजाम भूतपुर्व सरपंच,नैन सिंग पटेल अध्यक्ष पटेल समाज,विमला सिन्हा जी (अध्यक्ष सेवा सहकारी समिति चुरामन साहु समाजसेवी, संदीप साहू(ग्राम पटेल) कुंदन बडोले(सरपंच प्रतिनिधि)खुमान कुशाम,दानश्याम कोराम,गंभीर नेताम,खेलन सिंह ठाकर,श्रीमती शिव कुमारी भाउलोई, विमला कोराम सहित ध्रुव गोड़ समाज के प्रमुखजन व ग्रामवासी उपस्थित थे।

Author: Sudha Bag

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